28 C
Lucknow
Friday, September 11, 2026

ढहती इमारतें, ढहता भरोसा

Must read

 

डॉ. विजय गर्ग

जब कोई इमारत ढहती है, तो हमारी नजरें आमतौर पर टूटी दीवारों, गिरी छतों और मलबे के ढेर पर जाती हैं। लेकिन इस भौतिक विनाश के पीछे एक गहरा सवाल छिपा होता है—क्या केवल इमारत विफल हुई, या व्यवस्था भी विफल हुई?

इमारतें हमें आश्रय, सुरक्षा और स्थिरता देने के लिए बनाई जाती हैं। उनकी मजबूती केवल ईंट, सीमेंट और स्टील पर निर्भर नहीं करती, बल्कि उचित योजना, गुणवत्तापूर्ण सामग्री, कुशल निर्माण, नियमित निरीक्षण और जिम्मेदार रखरखाव भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं। इनमें से किसी भी स्तर पर लापरवाही हो तो इमारत सुरक्षित आश्रय के बजाय खतरा बन सकती है।

इसलिए किसी इमारत का ढहना केवल इंजीनियरिंग की विफलता नहीं माना जा सकता। इसके पीछे लापरवाही, कमजोर निगरानी, भ्रष्टाचार, अनधिकृत निर्माण, सुरक्षा मानकों के कमजोर पालन या पुरानी इमारतों के उचित रखरखाव की कमी जैसे कारण भी हो सकते हैं।

हर इमारत के गिरने से पहले उसकी एक कहानी होती है। दीवारों में दरारें, कमजोर नींव, पानी का रिसाव, क्षतिग्रस्त खंभे या बिना विशेषज्ञ सलाह के किए गए बदलाव—ये सभी संभावित चेतावनी संकेत हो सकते हैं। यदि इन संकेतों को समय रहते नजरअंदाज कर दिया जाए, तो टाली जा सकने वाली त्रासदी भी विनाशकारी हादसे में बदल सकती है।

ऐसी घटनाओं में सबसे बड़ी क्षति केवल संपत्ति की नहीं होती। मानव जीवन को दीवारों की तरह दोबारा नहीं बनाया जा सकता। परिवार अपने प्रियजनों को खो देते हैं, समुदाय अपनी सुरक्षा की भावना खो देता है और लोगों के मन में यह सवाल उठने लगता है कि उनकी सुरक्षा के लिए बनाई गई व्यवस्थाएँ वास्तव में काम कर रही हैं या नहीं।

यहीं से जनविश्वास का प्रश्न सामने आता है। नागरिकों को उम्मीद होती है कि भवन निर्माण नियमों को निष्पक्षता से लागू किया जाएगा, निर्माण मानकों का पालन होगा और खतरनाक इमारतों की पहचान किसी दुर्घटना से पहले कर ली जाएगी। केवल कागजों पर मौजूद नियम समाज को सुरक्षित नहीं बना सकते।

इसलिए बचाव से अधिक महत्वपूर्ण रोकथाम होनी चाहिए। विशेष रूप से पुरानी और कमजोर इमारतों का नियमित संरचनात्मक निरीक्षण होना चाहिए। निर्माण की गुणवत्ता की हर चरण पर निगरानी होनी चाहिए। अवैध निर्माण, अनधिकृत बदलाव और असुरक्षित निर्माण प्रथाओं को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। इंजीनियरों, निर्माणकर्ताओं, अधिकारियों और भवन मालिकों को समझना होगा कि सुरक्षा कोई औपचारिकता नहीं, बल्कि जिम्मेदारी है।

नागरिकों की भी अपनी भूमिका है। दिखाई देने वाली संरचनात्मक क्षति को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और केवल मरम्मत महंगी या असुविधाजनक होने के कारण असुरक्षित इमारतों में रहने का जोखिम नहीं उठाना चाहिए। समय पर खतरे की सूचना देना कई लोगों की जान बचा सकता है।

एक मजबूत समाज वह नहीं है जहाँ दुर्घटना के बाद प्रभावशाली राहत और बचाव अभियान चलाए जाएँ। मजबूत समाज वह है जहाँ टाली जा सकने वाली दुर्घटनाओं को पहले ही रोक लिया जाए।

जब कोई इमारत ढहती है, तो हमें केवल यह नहीं पूछना चाहिए कि “संरचना क्यों गिरी?” हमें यह भी पूछना चाहिए—“उसे गिरने से पहले रोका क्यों नहीं गया?”

कंक्रीट को दोबारा लगाया जा सकता है। दीवारें फिर बनाई जा सकती हैं। लेकिन जब लापरवाही के कारण जानें चली जाती हैं, तो भरोसे को दोबारा बनाने में बहुत अधिक समय लगता है।

सुरक्षित इमारतों के लिए मजबूत नींव जरूरी है और सुरक्षित समाज के लिए मजबूत, ईमानदार तथा जवाबदेह व्यवस्था।

डॉ. विजय गर्ग
सेवानिवृत्त प्राचार्य, शिक्षाविद् एवं प्रख्यात गणितज्ञ
स्ट्रीट कौर चंद, MHR मालोट, पंजाब – 152107

Must read

More articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Latest article