– 25 अगस्त को भेजे पत्र का अब तक जवाब नहीं
– पर्यटन विभाग ने संपत्तियों और विकास कार्यों का मांगा पूरा ब्योरा
लखनऊ/बलिया। शहीद स्मारक ट्रस्ट, बलिया की संपत्तियों और उससे जुड़े विकास कार्यों को लेकर शासन गंभीर है। पर्यटन विभाग के उप सचिव मोहम्मद वासिफ ने बताया कि विभाग की ओर से 25 अगस्त को जिलाधिकारी बलिया को पत्र भेजकर ट्रस्ट की वर्तमान स्थिति और विभिन्न बिंदुओं पर रिपोर्ट मांगी गई थी, लेकिन अब तक जिलाधिकारी कार्यालय की ओर से जवाब उपलब्ध नहीं कराया गया है।
उप सचिव ने कहा कि शासन इस मामले को गंभीरता से ले रहा है। जिलाधिकारी से ट्रस्ट की स्थिति की समीक्षा के लिए बैठक कर आवश्यक सूचनाएं उपलब्ध कराने को कहा गया है।
पत्र में ट्रस्ट की विधिक स्थिति, चल-अचल संपत्तियों, केंद्र एवं राज्य सरकार से स्वीकृत धनराशि से कराए गए कार्यों तथा उनकी वर्तमान स्थिति का विवरण मांगा गया है। साथ ही कराए गए कार्यों के अद्यतन छायाचित्र भी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
शासन ने विशेष रूप से 19 अगस्त 1992 को तत्कालीन प्रधानमंत्री द्वारा जयप्रकाश नारायण की स्मृति में घोषित एक करोड़ रुपये तथा तत्कालीन मुख्यमंत्री द्वारा घोषित 25 लाख रुपये से कराए गए कार्यों का विवरण और उनकी वर्तमान स्थिति भी मांगी है। इसके अलावा सुरहा ताल पक्षी विहार में कराए गए विकास कार्यों की जानकारी और अद्यतन फोटो भी मांगे गए हैं।
दस्तावेजों के मुताबिक, बलिया के स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान को देखते हुए शहीद स्मारक ट्रस्ट राष्ट्रीय स्तर का दर्जा है। वर्ष 1998 में तत्कालीन सांसद चंद्रशेखर ने तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को पत्र लिखकर शहीद स्मारक ट्रस्ट को राष्ट्रीय ट्रस्ट का दर्जा देने और केंद्र से बजटीय सहायता उपलब्ध कराने का सुझाव दिया था। इसके बाद प्रधानमंत्री श्री वाजपेई ने शहीद स्मारक ट्रस्ट को राष्ट्रीय घोषित किया था।
अब 25 अगस्त के पत्र का जवाब लंबित होने से मामला और महत्वपूर्ण हो गया है। शासन की नजर इस बात पर है कि ट्रस्ट की संपत्तियों और सरकारी धन से कराए गए विकास कार्यों की वर्तमान स्थिति क्या है और इनका उपयोग निर्धारित उद्देश्यों के अनुरूप हो रहा है या नहीं।


