लखनऊ। उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर भाजपा ने संगठन को पूरी तरह चुनावी मोड में डाल दिया है। यूपी प्रभारी विनोद तावड़े ने रविवार को लखनऊ में प्रदेश पदाधिकारियों की बैठक में साफ निर्देश दिया कि क्षेत्रीय अध्यक्ष और प्रभारी राजधानी में बैठने के बजाय अपने-अपने विधानसभा क्षेत्रों में जाएं और बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करें। उन्होंने स्वागत-सत्कार से दूर रहकर सीधे चुनावी तैयारी में जुटने को कहा।
करीब छह घंटे चली बैठक में तावड़े ने 2022 में हारी विधानसभा सीटों पर विशेष रणनीति बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पार्टी को पिछली हार की वजहों की समीक्षा कर कमजोर सीटों पर अभी से पूरी ताकत लगानी होगी। क्षेत्रीय पदाधिकारियों से विपक्षी दलों के संभावित उम्मीदवारों, जातीय समीकरण और जमीनी स्थिति की जानकारी जुटाने को भी कहा गया।
तावड़े ने पदाधिकारियों को मार्च तक चुनावी तैयारियों से छुट्टी न लेने का संदेश दिया। उन्होंने यहां तक कहा कि घर में शादी-ब्याह होने पर भी प्रदेश और क्षेत्रीय पदाधिकारियों को संगठन के काम से छुट्टी नहीं मिलेगी। बैठक में पदाधिकारियों से विधानसभा चुनाव लड़ने की इच्छा के बारे में भी पूछा गया, हालांकि किसी ने हाथ नहीं उठाया। उन्होंने कहा कि कुछ पदाधिकारियों ने व्यक्तिगत रूप से चुनाव लड़ने की इच्छा जताई है, जिस पर राष्ट्रीय नेतृत्व से चर्चा की जाएगी।
भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री संगठन बीएल संतोष 10-11 सितंबर को लखनऊ आएंगे। उनके दौरे से पहले युवा, महिला, किसान, अल्पसंख्यक, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़ा वर्ग मोर्चों की प्रदेश टीमों का गठन पूरा करने का लक्ष्य है। इसके बाद भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन के सितंबर में लखनऊ दौरे तक दिसंबर तक के प्रचार और चुनावी प्रबंधन का रोडमैप तैयार किया जाएगा।
तावड़े ने इससे पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी मुलाकात की। 403 विधानसभा सीटों वाले उत्तर प्रदेश में अगले साल फरवरी-मार्च में चुनाव संभावित हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के कमजोर प्रदर्शन के बाद 2027 का चुनाव पार्टी के लिए सत्ता बरकरार रखने की बड़ी चुनौती माना जा रहा है।


