30 C
Lucknow
Friday, September 4, 2026

18 साल से मालखाने में कैद राधा रानी की प्रतिमा को मंदिर तक पहुंचाने का संकल्प

Must read

 

– पंडित शिवाकांत जी महाराज ने लिया प्रण
– अगली जन्माष्टमी तक भदरस के राधा-कृष्ण मंदिर में अष्टधातु प्रतिमा होगी स्थापित

कानपुर/घाटमपुर। घाटमपुर क्षेत्र के भदरस गांव स्थित प्राचीन राधा-कृष्ण मंदिर में उस समय भावुक माहौल हो गया, जब प्रसिद्ध अंतर्राष्ट्रीय कथावाचक पंडित शिवाकांत जी महाराज मंदिर पहुंचे और राधा-कृष्ण के दर्शन करने के साथ वर्षों पुराने उस प्रकरण की जानकारी ली, जिसका इंतजार आज भी ग्रामीण कर रहे हैं।

करीब 18 वर्ष पहले मंदिर से राधा रानी की अष्टधातु प्रतिमा चोरी हो गई थी। पुलिस कार्रवाई के बाद प्रतिमा बरामद भी हो गई, लेकिन कानूनी प्रक्रिया और न्यायालय से जुड़ी औपचारिकताओं के कारण प्रतिमा आज तक मंदिर में विराजमान नहीं हो सकी है। वह वर्षों से मालखाने में सुरक्षित है।

राधा रानी की प्रतिमा के मंदिर में वापस आने की प्रतीक्षा ग्रामीणों की आस्था का हिस्सा बन चुकी है। विशेष रूप से जन्माष्टमी के अवसर पर जब पूरा देश भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी की भक्ति में डूबा रहता है, तब भदरस के लोगों की यह कसक और गहरी हो जाती है कि उनकी आराध्या की प्रतिमा मंदिर में नहीं है।
इसी भाव को महसूस करते हुए पंडित शिवाकांत जी महाराज ने मंदिर परिसर में ग्रामीणों और श्रद्धालुओं के बीच संकल्प लिया कि अगली जन्माष्टमी तक राधा रानी की अष्टधातु प्रतिमा को पुनः मंदिर में स्थापित कराने की दिशा में हर संभव वैधानिक और प्रशासनिक प्रयास किया जाएगा।

उन्होंने स्पष्ट किया कि यह केवल एक प्रतिमा को मंदिर में वापस लाने का विषय नहीं है, बल्कि 18 वर्षों से चली आ रही ग्रामीणों की आस्था और प्रतीक्षा से जुड़ा मामला है।

पंडित शिवाकांत जी महाराज ने कहा कि कानून और न्यायिक प्रक्रिया का पूरा सम्मान करते हुए संबंधित अधिकारियों और न्यायालय के समक्ष आवश्यक प्रयास किए जाएंगे, ताकि सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद राधा रानी को उनके वास्तविक स्थान पर पुनः विराजमान कराया जा सके।

‘18 साल से प्रतिमा मालखाने में, आस्था आज भी मंदिर में’

पंडित शिवाकांत जी महाराज ने कहा, “राधा रानी की प्रतिमा 18 वर्षों से मालखाने में है, लेकिन भदरस के लोगों की आस्था आज भी उसी मंदिर में जीवित है। मेरा संकल्प है कि अगले वर्ष जन्माष्टमी तक इस प्रतिमा को मंदिर में पुनः विराजमान कराने की दिशा में पूरी निष्ठा से प्रयास करूंगा।”
उन्होंने कहा कि यह किसी एक व्यक्ति का संकल्प नहीं, बल्कि उन ग्रामीणों की भावनाओं से जुड़ा संकल्प है, जो वर्षों से राधा रानी के मंदिर लौटने की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि यदि किसी धार्मिक प्रतिमा को कानूनी प्रक्रिया के कारण मंदिर से दूर रहना पड़ रहा है तो कानून का सम्मान करते हुए उसके समाधान का रास्ता तलाशना चाहिए। आस्था और कानून को आमने-सामने खड़ा करने के बजाय कानून के दायरे में आस्था का सम्मान सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
उन्होंने भरोसा दिलाया कि मामला केवल जन्माष्टमी तक चर्चा का विषय नहीं रहेगा। संबंधित विभागों और अधिकारियों से संपर्क कर वैधानिक प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा।
पंडित शिवाकांत जी महाराज के संकल्प का ग्रामीणों ने स्वागत किया। ग्रामीणों का कहना है कि करीब दो दशक से मंदिर में राधा रानी की प्रतिमा की प्रतीक्षा उनके लिए भावनात्मक विषय बनी हुई है। महाराज के संकल्प से उन्हें उम्मीद जगी है कि अब इस मामले में आगे कोई रास्ता निकल सकता है।
अब भदरस गांव की नजरें अगली जन्माष्टमी पर टिकी हैं। ग्रामीणों को उम्मीद है कि तब तक कानूनी औपचारिकताएं पूरी होंगी और अष्टधातु की राधा रानी की प्रतिमा एक बार फिर अपने मंदिर में विराजमान होकर भक्तों को दर्शन देगी।

Must read

More articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Latest article