– जमीनी कार्यकर्ताओं और दूसरे दलों से आए नेताओं तक को पास नहीं
लखनऊ। मुख्यमंत्री की सभा को लेकर भाजपा संगठन की अंदरूनी व्यवस्थाएँ सड़कों पर आ गयीं हैं, जिन दलित और पिछड़े वर्ग के भाजपा नेताओं ने वर्षों तक पार्टी के लिए जमीन पर संघर्ष किया, उन्हें मुख्यमंत्री के मंच और कार्यक्रम की महत्वपूर्ण व्यवस्था से दूर रखा गया।
सबसे ज्यादा चर्चा ‘डंडी वाले नेता जी’ की भूमिका को लेकर है। आरोप है कि उन्होंने रूपेश गुप्ता के समर्थक नेताओं को चुन-चुनकर कार्यक्रम से बाहर कराया,और उन्हें मुख्यमंत्री की सभा के लिए पास तक नहीं मिल सके। पार्टी के भीतर इसे लेकर कार्यकर्ताओं में नाराजगी की चर्चा है। सवाल यह है कि क्या मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में प्रवेश और मंच की व्यवस्था राजनीतिक पसंद-नापसंद का माध्यम बन गई है?
कार्यकर्ताओं का कहना है कि लंबे समय से भाजपा के लिए काम कर रहे कई नेताओं के साथ-साथ दूसरे दलों से भाजपा में शामिल हुए नेताओं को भी कार्यक्रम का पास नहीं दिया गया। इससे संगठन के भीतर यह सवाल उठ रहा है कि यदि पार्टी में आने के बाद भी नेताओं और कार्यकर्ताओं को सम्मानजनक स्थान नहीं मिलता, तो जमीनी स्तर पर इसका संदेश क्या जाएगा?
सबसे बड़ा सवाल उन दलित और पिछड़े वर्ग के नेताओं को लेकर है, जिन्होंने पार्टी के विस्तार के दौर में गांव-गांव और बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने में भूमिका निभाई। आरोप है कि ऐसे नेताओं को मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में आगे आने का अवसर नहीं मिला, जबकि प्रभावशाली चेहरों को प्राथमिकता दी गई।
वरिष्ठ पत्रकारों को पास नहीं, नए ‘इन्फ्लुएंसर’ बने खास
सभा की मीडिया व्यवस्था भी चर्चा में है। हैरानी की बात यह बताई जा रही है कि कई वरिष्ठ और वर्षों से पत्रकारिता कर रहे पत्रकारों को भी पास जारी नहीं किए गए। वहीं पहली बार बड़ी संख्या में सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसरों को पास दिए जाने की बात सामने आई है।
यहीं से सूचना व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़ा होता है। सवाल यह नहीं कि इन्फ्लुएंसरों को कार्यक्रम में स्थान क्यों दिया गया, बल्कि सवाल यह है कि क्या वर्षों से पत्रकारिता कर रहे मान्यता प्राप्त और वरिष्ठ पत्रकारों की जगह अब बिना स्पष्ट पत्रकारिता मानकों वाले सोशल मीडिया चेहरों को प्राथमिकता दी जा रही है?


