ग्लेशियर टूटने के 38 मिनट बाद मिला अलर्ट; 1127 मौतें
काठमांडू। नेपाल में विनाशकारी बाढ़ के सात दिन बाद भी तबाही का मंजर खत्म नहीं हुआ है। बाढ़ में अब तक 1127 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि करीब 4858 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। सबसे गंभीर सवाल आपदा चेतावनी तंत्र को लेकर उठ रहे हैं। 26 अगस्त को ग्लेशियर टूटने और अचानक बाढ़ आने के करीब 38 मिनट बाद चेतावनी जारी हुई, तब तक प्रभावित लोगों के पास सुरक्षित स्थान पर पहुंचने के लिए पर्याप्त समय नहीं बचा था।
बाढ़ प्रभावित लोगों का कहना है कि वे समय पर चेतावनी मिलने के बजाय किस्मत के भरोसे बच पाए। आपदा ने हाइड्रोपावर परियोजनाओं, सड़कों, पुलों, स्कूलों और अस्पतालों को भारी नुकसान पहुंचाया है। दर्जनों हाइड्रोपावर परियोजनाओं में काम करने वाले सैकड़ों कर्मचारी अब भी लापता हैं और कई के सुरंगों में फंसे होने की आशंका है।
बाढ़ के बाद बड़ी संख्या में अज्ञात शव मिलने से पहचान का संकट भी खड़ा हो गया है। शवों के अवशेष सुरक्षित रखने और बाद में डीएनए जांच से पहचान सुनिश्चित करने के लिए कई शवों को जलाने के बजाय दफनाया जा रहा है। भारत की टीम भी डीएनए जांच में मदद कर रही है। उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में मिले नेपाल के पांच नागरिकों के शव मंगलवार को सोनौली सीमा पर नेपाल पुलिस को सौंपे गए।
इस बीच राहत और बचाव अभियान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेज हो गया है। भारत ने नेपाल के लिए पांचवीं राहत उड़ान भेजी है, जिसमें 11 सदस्यीय विशेष रेस्क्यू टीम, अत्याधुनिक उपकरण और 5.5 टन दवाइयां भेजी गई हैं। इससे पहले चार उड़ानों के जरिए करीब 68.5 टन राहत सामग्री पहुंचाई जा चुकी है। अमेरिका की 13 सदस्यीय रेस्क्यू टीम भी रसुवा पहुंची है, जो हाइड्रोपावर परियोजनाओं की सुरंगों में लापता लोगों की तलाश में मदद करेगी।
लगातार बारिश के कारण सुन कोशी, बूढ़ी गंडकी और महाकाली नदियों का जलस्तर भी चेतावनी स्तर से ऊपर है। निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित और ऊंचे स्थानों पर जाने की सलाह दी गई है। उधर अभिनेता सोनू सूद भी काठमांडू पहुंचकर बाढ़ पीड़ितों से मिले और राहत सामग्री वितरित की। संकट के बीच नेपाल में अब राहत के साथ-साथ यह सवाल भी उठ रहा है कि अगर चेतावनी समय पर मिलती तो क्या इतनी बड़ी मानवीय त्रासदी को कुछ हद तक टाला जा सकता था।


