डीएम के आदेश की भी अनदेखी! बाढ़ का पानी उतरने के बाद भी छिड़काव नहीं, वायरल फीवर से जूझ रहे ग्रामीण; सीएम योगी के सामने मामला उठाने की तैयारी
अमृतपुर
बाढ़ का पानी उतर गया, लेकिन गांवों से बीमारी का खतरा नहीं उतरा। विकासखंड राजेपुर की ग्राम पंचायतों में मच्छरों के बढ़ते प्रकोप के बीच दवा छिड़काव की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले वर्ष की तरह इस वर्ष भी दवा छिड़काव को लेकर निर्देश तो खूब दिए गए, लेकिन उनका असर गांव की गलियों और जलभराव वाले इलाकों में दिखाई नहीं दे रहा। सवाल यह भी उठ रहा है कि जब दवा छिड़काव के लिए सरकारी धन खर्च होता है तो आखिर गांवों में दवा का छिड़काव दिखाई क्यों नहीं देता?
बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में पानी जमा रहने के कारण मच्छरों की संख्या तेजी से बढ़ी है। पानी उतरने के बाद हालात और चिंताजनक हो गए हैं। ग्रामीणों के मुताबिक कई परिवारों में बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग वायरल फीवर तथा बुखार जैसी बीमारियों से परेशान हैं। इसके बावजूद जिम्मेदार विभागों की ओर से व्यापक स्तर पर दवा छिड़काव न होने का आरोप है।
बाढ़ प्रभावित क्षेत्र तीसराम की मड़ैयों में निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर ने ग्राम पंचायतों में दवा छिड़काव कराने के निर्देश दिए थे। खंड विकास अधिकारी और प्रभारी चिकित्सा अधिकारी को भी मच्छरों के प्रकोप को रोकने के लिए आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे। लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि आदेश के बावजूद कई गांवों में अभी तक दवा छिड़काव नहीं कराया गया।
यहीं से सबसे बड़ा सवाल खड़ा होता है—क्या सरकारी आदेश सिर्फ कागजों पर जारी होने के लिए हैं? क्या दवा छिड़काव की कार्रवाई भी कागजों में पूरी दिखाई जाएगी? और यदि भुगतान या धनराशि का उपयोग दर्शाया जाता है तो उसका सत्यापन आखिर कौन करेगा?
ग्रामीणों ने मांग की है कि प्रत्येक ग्राम पंचायत में दवा छिड़काव के नाम पर निकाली गई धनराशि, खरीदी गई दवा, छिड़काव की तारीख, क्षेत्र और वास्तविक कार्य का स्थलीय सत्यापन कराया जाए। साथ ही संबंधित ग्राम पंचायतों में मौके पर जांच कराई जाए कि वास्तव में कितने गांवों और कितने मोहल्लों में दवा का छिड़काव हुआ।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि प्रशासनिक आदेश के बावजूद धरातल पर कार्रवाई नहीं हुई है तो जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। उनका यह भी सवाल है कि बाढ़ के बाद बीमारी का खतरा सबसे ज्यादा होने के समय यदि दवा का छिड़काव नहीं होगा तो फिर सरकारी व्यवस्था किस समय सक्रिय होगी?
मामले ने अब राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर हलचल पैदा कर दी है। कुछ ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा है कि यदि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का कार्यक्रम डबरी में लगता है तो वे उनके सामने बाढ़ राहत, जलभराव और दवा छिड़काव की कथित अनदेखी का मुद्दा उठाएंगे।
अब निगाह प्रशासन पर है कि वह ग्रामीणों के आरोपों की जांच कराकर कागज और धरातल के बीच का अंतर सामने लाता है या फिर दवा छिड़काव का मामला भी सरकारी फाइलों में निपटा हुआ मान लिया जाता है।


