चचेरे भाई की तैनाती से लेकर सरकारी खरीद तक सवाल
कन्नौज। नगर पंचायत समधन की अधिशासी अधिकारी दिव्या गुप्ता की कार्यप्रणाली को लेकर स्थानीय लोगों ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। आरोप है कि सरकारी नियमों को दरकिनार कर रिश्तेदार को संविदा पर तैनाती देने से लेकर विकास कार्यों और हाईमास्ट लाइटों की खरीद तक में अनियमितताएं की गईं। लोगों ने जिलाधिकारी से पूरे मामले की कमेटी गठित कर निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
ताऊ के बेटे को संविदा पर नौकरी देने का आरोप
स्थानीय लोगों का आरोप है कि अधिशासी अधिकारी दिव्या गुप्ता ने अपने ताऊ के बेटे आशीष गुप्ता को नगर पंचायत में संविदा पर कंप्यूटर ऑपरेटर के पद पर तैनात कराया। लोगों ने नियुक्ति प्रक्रिया और पात्रता की जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि नियुक्ति में नियमों की अनदेखी हुई है तो जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
महिला सफाई कर्मचारियों ने कर दी आशीष की धुनाई
कुछ दिन पहले नगर पंचायत की महिला सफाई कर्मचारियों और आशीष गुप्ता के बीच विवाद के बाद मारपीट का मामला सामने आया था। स्थानीय लोगों के मुताबिक, सफाई कर्मचारियों से वसूली को लेकर विवाद हुआ, जिसके बाद महिलाओं ने आशीष गुप्ता के साथ मारपीट कर दी। लेकिन इस घटना ने नगर पंचायत की कार्यप्रणाली पर चर्चा तेज कर दी है।
हाईमास्ट लाइटों की खरीद में कीमतों पर सवाल
स्थानीय नागरिकों ने हाईमास्ट लाइटों की खरीद को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि कई लाइटें बाजार कीमत से कई गुना अधिक दर पर खरीदी गईं। आरोप यह भी है कि कुछ स्थानों पर लाइटें स्थापित किए बिना ही भुगतान कर दिया गया। लोगों ने टेंडर प्रक्रिया, खरीद बिल, भुगतान और मौके पर लाइटों की स्थिति का भौतिक सत्यापन कराने की मांग की है।
काम जमीन पर कम, कागजों में ज्यादा होने का आरोप
लोगों का आरोप है कि नगर पंचायत में विकास कार्यों के नाम पर ठेकेदारों के माध्यम से नियमों की अनदेखी की गई। कई कार्यों की गुणवत्ता और वास्तविक स्थिति पर भी सवाल उठाए गए हैं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि अभिलेखों की जांच के साथ मौके पर कराए गए कार्यों का मिलान कराया जाए तो स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
जिलाधिकारी से जांच कमेटी की मांग
समधन के लोगों ने जिलाधिकारी कन्नौज से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए कमेटी गठित करने की मांग की है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि जांच में संविदा नियुक्ति, हाईमास्ट लाइटों की खरीद, भुगतान, विकास कार्यों और संबंधित ठेकेदारों की भूमिका को शामिल किया जाए।
जिला स्तर पर सुनवाई नहीं तो नगर विकास विभाग जाएंगे
शिकायतकर्ताओं ने कहा है कि यदि जिला स्तर पर मामले की निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो वे नगर विकास विभाग में शिकायत कर उच्चस्तरीय जांच की मांग करेंगे। फिलहाल लगाए गए आरोपों की


