हर माह 3.49 लाख के भुगतान पर सवाल
सरकारी धन के दुरुपयोग के आरोप
कन्नौज
नगर पंचायत समधन में ठोस कचरा प्रबंधन व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। नगर पंचायत में गीले और सूखे कूड़े के अलग-अलग संग्रहण एवं प्रबंधन के लिए बनाया गया एमआरएफ सेंटर (मैटेरियल रिकवरी फैसिलिटी) पर लंबे समय से नियमित रूप से संचालित नहीं हो रहा है। इसके बावजूद हर माह करीब 3.49 लाख रुपये की धनराशि आहरित किए जाने के आरोप सामने आए हैं।
आरोप है कि जिस एमआरएफ सेंटर पर प्रतिदिन नगर से निकलने वाले कूड़े का संग्रह, छंटाई और निस्तारण होना चाहिए, वहां व्यवस्था धरातल पर दिखाई नहीं दे रही है। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि जब सेंटर का अपेक्षित संचालन ही नहीं हो रहा तो लाखों रुपये का भुगतान किस आधार पर किया जा रहा है।
मामले में स्थानीय स्तर पर यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि 3.49 लाख रुपये की मासिक राशि में से एक लाख रुपये नगर पंचायत अध्यक्ष, डेढ़ लाख रुपये अधिशासी अधिकारी और शेष रकम ठेकेदार को दिए जाने की व्यवस्था है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आना अभी बाकी है।
यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला सरकारी धन के दुरुपयोग और नियमों की अनदेखी से जुड़ा गंभीर प्रकरण हो सकता है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि बिना प्रभावी काम के भुगतान की प्रक्रिया कैसे आगे बढ़ी और जिम्मेदार अधिकारियों ने कार्य की वास्तविक स्थिति का सत्यापन किस आधार पर किया।एमआरएफ सेंटर के संचालन, उपस्थिति पंजिका, कूड़ा संग्रहण के रिकॉर्ड, वाहन संचालन, बिल-वाउचर, भुगतान पत्रावली और ठेकेदार को किए गए भुगतान की जांच होने पर पूरे मामले की तस्वीर साफ हो सकती है। साथ ही यह भी देखा जाना जरूरी है कि नगर पंचायत द्वारा जिस कार्य के लिए बजट खर्च किया जा रहा है, उसका लाभ वास्तव में नगरवासियों को मिल रहा है या नहीं।नगरवासियों ने जिलाधिकारी एवं संबंधित उच्चाधिकारियों से मामले की निष्पक्ष जांच कराने और जांच में अनियमितता मिलने पर जिम्मेदार लोगों से सरकारी धन की वसूली के साथ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।


