भीषण बाढ़ से तबाही, 95 की मौत; 500 से ज्यादा लापता,105 भारतीय शामिल, दूतावास ने जारी किए हेल्पलाइन नंबर
काठमांडू/ नई दिल्ली नेपाल-तिब्बत सीमा पर बुधवार सुबह भोटेकोशी नदी में अचानक आई भीषण बाढ़ ने रसुवा समेत कई जिलों में भारी तबाही मचा दी। तेज बहाव और मलबे की चपेट में आकर घर, सड़कें, पुल और जलविद्युत परियोजनाएं बह गईं। नेपाल पुलिस के मुताबिक हादसे में अब तक 95 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 500 से अधिक लोग लापता बताए जा रहे हैं।
नेपाल पर्यटन बोर्ड के अनुसार लापता लोगों में 105 भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटकों के भी लापता होने की सूचना है। कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए भारतीय यात्रियों के फंसे होने की खबरों के बीच भारतीय दूतावास ने सहायता के लिए हेल्पलाइन नंबर +977 985 131 6807 और +977 970 910 7500 जारी किए हैं।
बाढ़ से रसुवा, नुवाकोट, धादिंग, गोरखा और चितवन समेत कई जिले प्रभावित हुए हैं। करीब 42 किलोमीटर सड़क और कई पुल क्षतिग्रस्त हुए हैं। रसुवा और नुवाकोट में 13 जलविद्युत परियोजनाओं को नुकसान पहुंचा है। लांगटांग खोला परियोजना में काम कर रहे करीब 60 लोगों के भी लापता होने की जानकारी है।
अचानक आई बाढ़ के कारणों की जांच जारी है। ग्लेशियल झील फटने और नदी का रास्ता अवरुद्ध होने के बाद अचानक पानी का बांध टूटने जैसी आशंकाओं की जांच की जा रही है। नेपाल में सेना और सुरक्षा एजेंसियों का बड़े पैमाने पर राहत-बचाव अभियान जारी है।
नेपाल की बाढ़ का असर भारत के सीमावर्ती इलाकों पर भी पड़ने की आशंका है। बिहार में गंडक नदी के जलस्तर को लेकर पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर और वैशाली में सतर्कता बढ़ाई गई है। उत्तर प्रदेश के महाराजगंज और कुशीनगर में भी निगरानी तेज कर दी गई है।
भारत ने नेपाल की मदद के लिए 10 टन राहत सामग्री और जरूरी दवाएं भेजी हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री से बात कर हरसंभव मानवीय सहायता का भरोसा दिया है। भारतीय वायुसेना के विमान भी राहत एवं बचाव अभियान के लिए तैयार रखे गए हैं।


