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Wednesday, August 26, 2026

नेपाल में भीषण बाढ़ से तबाही, 100 की मौत, 1,000 से ज्यादा लापता

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क्रॉसर : नेपाल की त्रासदी में भारत बना मददगार, 133 भारतीय लापता; दूतावास ने हेल्पलाइन जारी की, 10 टन राहत सामग्री भेजी

सब हेडिंग :
पुल-पावर प्लांट बहे, कई जिले जलमग्न; फिर बाढ़ का खतरा, भारत के बिहार-यूपी में भी अलर्ट

काठमांडू/नई दिल्ली। नेपाल-तिब्बत सीमा पर बुधवार सुबह आई भीषण बाढ़ ने हिमालयी क्षेत्र में भारी तबाही मचा दी। भोटेकोशी नदी में अचानक आए सैलाब ने देखते ही देखते घरों, सड़कों, पुलों और जलविद्युत परियोजनाओं को अपनी चपेट में ले लिया। नेपाल में 100 लोगों की मौत और 1,000 से ज्यादा लोगों के लापता होने की खबर है। राहत और बचाव अभियान के साथ लापता लोगों की तलाश तेज कर दी गई है।

133 भारतीय भी लापता, कैलाश मानसरोवर यात्रा से जुड़े यात्री शामिल

बाढ़ की सबसे बड़ी चिंता भारतीय यात्रियों को लेकर है। उपलब्ध सूचनाओं के मुताबिक 133 भारतीय नागरिक लापता हैं। इनमें कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जा रहे कई तीर्थयात्री शामिल हैं। नेपाल में फंसे भारतीयों की जानकारी और सहायता के लिए काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास ने +977 985 131 6807 और +977 970 910 7500 हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं। दूतावास नेपाली अधिकारियों के साथ मिलकर राहत और बचाव कार्य में समन्वय कर रहा है।

भारत ने बढ़ाया मदद का हाथ, भेजी 10 टन राहत सामग्री

नेपाल की त्रासदी के बीच भारत ने तत्काल सहायता पहुंचाई है। भारत ने 10 टन राहत सामग्री और जरूरी चिकित्सा सामान भेजा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह से बात कर जनहानि पर संवेदना जताई और संकट की इस घड़ी में हरसंभव मानवीय सहायता का भरोसा दिया। भारत और नेपाल की एजेंसियां प्रभावित भारतीयों को सुरक्षित निकालने के प्रयास में जुटी हैं।

पुल और बिजली परियोजनाएं तबाह, संपर्क व्यवस्था प्रभावित

बाढ़ से रसुवा, नुवाकोट, धादिंग, चितवन, गोरखा और आसपास के कई जिले प्रभावित हुए हैं। तेज बहाव में सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त हो गए। करीब एक दर्जन जलविद्युत परियोजनाओं को नुकसान पहुंचने की जानकारी है। प्रमुख परियोजनाओं में रसुवागढ़ी, सानजेन खोला और अपर त्रिशूली-3ए भी प्रभावित हुए हैं। कई इलाकों में संचार और यातायात व्यवस्था बाधित होने से राहत दलों को पहुंचने में कठिनाई हो रही है।

भूकंप के बाद ग्लेशियर खिसकने की आशंका, बारिश से नहीं आई बाढ़

नेपाल के विदेश मंत्री के अनुसार तिब्बत क्षेत्र में सुबह भूकंप के झटके महसूस किए गए और कुछ ही मिनट बाद अचानक बाढ़ की सूचना मिली। शुरुआती जांच में भूकंप के कारण ग्लेशियर या चट्टानों के खिसकने और नदी में अचानक पानी बढ़ने की आशंका जताई गई है। नेपाल के जल एवं मौसम अधिकारियों के अनुसार प्रभावित रसुवा क्षेत्र में बाढ़ का कारण सामान्य बारिश नहीं थी।

खतरा अभी टला नहीं, दोबारा बाढ़ की चेतावनी

अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि नदी के ऊपरी हिस्से में बना जल अवरोध पूरी तरह खाली नहीं हुआ है। इसके अचानक टूटने पर भोटेकोशी और त्रिशूली नदी क्षेत्रों में दोबारा बाढ़ आ सकती है। लोगों को नदी किनारे से दूर रहने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी गई है।

भारत में भी बढ़ी चिंता, बिहार-यूपी में निगरानी तेज

नेपाल से आने वाले पानी के संभावित असर को देखते हुए भारत के सीमावर्ती इलाकों में भी निगरानी बढ़ाई गई है। बिहार के पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर और वैशाली में प्रशासन सतर्क है। उत्तर प्रदेश के महाराजगंज और कुशीनगर में भी नदी के जलस्तर पर नजर रखी जा रही है।

वर्ल्ड बैंक से बड़ी आर्थिक मदद की तैयारी

बाढ़ से तबाह नेपाल के सामने अब राहत के साथ पुनर्निर्माण की बड़ी चुनौती है। आपके उपलब्ध अपडेट के मुताबिक वर्ल्ड बैंक ने राहत और प्रभावित क्षेत्रों के पुनर्निर्माण के लिए करीब 25 अरब नेपाली रुपये तक की आपात सहायता जुटाने की पेशकश की है। इससे बुनियादी ढांचे, राहत और पुनर्वास कार्यों को गति मिलने की उम्मीद है।

नेपाल सेना के साथ चीन भी रेस्क्यू में जुटा

नेपाल सेना, सशस्त्र पुलिस और नेपाल पुलिस ने प्रभावित क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर अभियान शुरू किया है। हेलिकॉप्टरों के जरिए दुर्गम इलाकों में फंसे लोगों तक पहुंचने और उन्हें निकालने का प्रयास जारी है। चीन ने भी तिब्बत के प्रभावित क्षेत्र में अपने सुरक्षाबलों और बचाव दलों को तैनात किया है।

नेपाल में आई यह त्रासदी सिर्फ एक प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि भारत समेत पूरे हिमालयी क्षेत्र के लिए बड़ी मानवीय और सुरक्षा चुनौती बन गई है। एक ओर हजारों परिवार अपनों की तलाश में हैं, वहीं दूसरी ओर दोबारा बाढ़ के खतरे ने प्रशासन और राहत एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है।

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