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Tuesday, August 25, 2026

यूपी के युवा अब दुनिया की जरूरत बन रहे हैं

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रोजगार के बदलते भूगोल के बीच सवाल यह भी कि प्रदेश में कितने अवसर पैदा हो रहे हैं

 

उत्तर प्रदेश के युवाओं के लिए दुनिया के दरवाजे खुलना निश्चित रूप से बदलते समय का संकेत है। जापान, जर्मनी और इजराइल जैसे देशों की ओर से उत्तर प्रदेश के युवाओं को रोजगार के अवसर मिलना केवल सरकार की उपलब्धि के रूप में देखने का विषय नहीं है, बल्कि यह उस युवा शक्ति की क्षमता का प्रमाण भी है, जो सही प्रशिक्षण और अवसर मिलने पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकती है।

लखनऊ में 3,446 प्राविधिक सहायकों और 126 मंडी सचिवों को नियुक्ति-पत्र वितरित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसी बदलते परिदृश्य का उल्लेख किया। उनका कहना था कि आज दुनिया उत्तर प्रदेश के युवाओं को अपने यहां काम करने के लिए आमंत्रित कर रही है। जापान के प्रतिनिधिमंडल से लेकर इजराइल में काम कर रहे भारतीय युवाओं तक का उदाहरण देते हुए उन्होंने प्रदेश की युवा शक्ति को विकास की सबसे बड़ी ताकत बताया।

यह तस्वीर निश्चित रूप से उत्साह पैदा करती है। लेकिन इसके साथ एक बड़ा सवाल भी जुड़ा है,क्या उत्तर प्रदेश अपने युवाओं को इतनी बड़ी संख्या में रोजगार देने की क्षमता स्वयं विकसित कर पा रहा है, जितनी दुनिया उनसे मांग रही है?
यही सवाल आने वाले वर्षों की रोजगार नीति का केंद्र होना चाहिए।
इजराइल में करीब पांच हजार युवाओं के काम करने और उन्हें लगभग डेढ़ लाख रुपये मासिक आय मिलने का मुख्यमंत्री का उल्लेख यह बताता है कि कुशल भारतीय श्रमिकों की अंतरराष्ट्रीय मांग कितनी बढ़ी है। यदि विदेश जाने वाला युवा बेहतर वेतन पाकर अपने परिवार को आर्थिक मजबूती देता है तो यह उसके लिए और उसके परिवार के लिए बड़ी उपलब्धि है।
लेकिन उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य के लिए केवल युवाओं को विदेश भेजना पर्याप्त लक्ष्य नहीं हो सकता। प्रदेश को ऐसा औद्योगिक और आर्थिक वातावरण भी बनाना होगा, जहां वही युवा अपने गांव, कस्बे या शहर में रहकर सम्मानजनक आय अर्जित कर सके।
युवा को विकल्प मिलना चाहिए,वह चाहे तो जापान जाए, चाहे इजराइल में काम करे और चाहे अपने ही जिले में रोजगार या उद्यम खड़ा करे।

3,446 प्राविधिक सहायकों की नियुक्ति कृषि व्यवस्था के लिए खास महत्व रखती है। उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था में कृषि की भूमिका आज भी बड़ी है। खेत में तकनीक, वैज्ञानिक सलाह, फसल प्रबंधन, बाजार की जानकारी और सरकारी योजनाओं का सही लाभ पहुंचाने में प्रशिक्षित तकनीकी मानव संसाधन की आवश्यकता लगातार बढ़ रही है।
126 मंडी सचिवों की नियुक्तियां भी कृषि बाजार व्यवस्था को मजबूत करने के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं। किसान के लिए केवल उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं है। उसे अपने उत्पाद का उचित बाजार, पारदर्शी तौल, सही मूल्य और समय पर भुगतान भी चाहिए।
यदि नई नियुक्तियां केवल पद भरने तक सीमित न रहकर कृषि और मंडी व्यवस्था में वास्तविक सुधार का माध्यम बनती हैं, तभी इनका उद्देश्य पूरा माना जाएगा।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में 2017 से पहले के उत्तर प्रदेश की तस्वीर भी सामने रखी। उन्होंने प्रदेश को बीमारू राज्य बताए जाने, युवाओं के पलायन, किसानों की समस्याओं, कानून-व्यवस्था और बिजली संकट का उल्लेख किया।

राजनीतिक भाषणों में अतीत और वर्तमान की तुलना स्वाभाविक है। लेकिन जनता के लिए असली कसौटी भाषण नहीं, परिणाम हैं।
आज उत्तर प्रदेश में बिजली, सड़क, कानून-व्यवस्था, निवेश और रोजगार के क्षेत्र में हुए बदलावों का मूल्यांकन भी होना चाहिए और जहां कमियां हैं, उनकी पहचान भी। विकास का अर्थ केवल यह नहीं कि पहले से स्थिति बेहतर है; विकास का अगला सवाल यह है कि अब कितनी तेजी से आगे बढ़ना है।
मुख्यमंत्री ने प्रदेश में चीनी की उपलब्धता का उल्लेख करते हुए कहा कि करीब चार लाख टन की मासिक खपत के मुकाबले 28 लाख टन चीनी उपलब्ध है। उन्होंने 15 अक्टूबर से नए पेराई सत्र की शुरुआत और करीब 90 लाख टन चीनी उत्पादन की क्षमता की बात कही।

चीनी उद्योग उत्तर प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था से सीधे जुड़ा है। चीनी मिलें केवल चीनी नहीं बनातीं, बल्कि गन्ना किसानों, श्रमिकों, परिवहन और ग्रामीण बाजारों की पूरी आर्थिक श्रृंखला को प्रभावित करती हैं।

इसलिए चीनी का पर्याप्त भंडार एक पहलू है, लेकिन इससे भी बड़ा सवाल गन्ना किसान का है,उसे समय पर भुगतान कितना मिला, लागत के मुकाबले उसकी आय कितनी बढ़ी और चीनी उद्योग की आर्थिक मजबूती का लाभ किसान तक कितनी तेजी से पहुंचा।
उत्तर प्रदेश की सबसे बड़ी पूंजी उसकी युवा आबादी है। यही आबादी प्रदेश की सबसे बड़ी चुनौती भी है। हर वर्ष लाखों युवा रोजगार बाजार में प्रवेश करते हैं। उनके सामने सिर्फ सरकारी नौकरी का विकल्प नहीं हो सकता।

सरकार को तीन स्तरों पर एक साथ काम करना होगा—कौशल, रोजगार और उद्यम।

जिस युवा को जापान में नौकरी मिल सकती है, उसे अंतरराष्ट्रीय स्तर का कौशल प्रशिक्षण अपने जिले में मिलना चाहिए। जिस युवा को इजराइल में डेढ़ लाख रुपये महीने मिल सकते हैं, उसे अपने प्रदेश में भी बेहतर वेतन वाली नौकरियों के अवसर मिलने चाहिए। और जो युवा नौकरी नहीं करना चाहता, उसे उद्यम शुरू करने के लिए पूंजी, तकनीक और बाजार उपलब्ध कराया जाना चाहिए।

दुनिया यूपी के युवाओं को देख रही है, अब यूपी को भी अपने युवाओं को देखना होगा

मुख्यमंत्री का यह कहना महत्वपूर्ण है कि जब युवा ऊर्जा को प्रोत्साहित किया जाता है तो परिणाम सामने आते हैं। लेकिन युवा ऊर्जा केवल सरकारी नियुक्तियों से नहीं संभाली जा सकती।

उत्तर प्रदेश को ऐसी अर्थव्यवस्था बनानी होगी जहां छोटे शहरों में उद्योग हों, जिलों में रोजगार के केंद्र विकसित हों, कृषि से जुड़े व्यवसाय बढ़ें और तकनीकी शिक्षा सीधे रोजगार से जुड़ी हो।

तभी विदेश में काम करने वाला यूपी का युवा केवल पलायन करने वाला श्रमिक नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की वैश्विक पहचान का वाहक बनेगा।
आज जापान, जर्मनी और इजराइल यूपी के युवाओं की ओर देख रहे हैं तो इसे अवसर की तरह लेना चाहिए। मगर लक्ष्य इससे बड़ा होना चाहिए—दुनिया यूपी के युवाओं को नौकरी देने के लिए कतार में खड़ी हो और यूपी के भीतर भी दुनिया की कंपनियां युवाओं को रोजगार देने के लिए आएं।
यही वह परिवर्तन होगा जिसकी प्रतीक्षा उत्तर प्रदेश का युवा कर रहा है।
सरकार की उपलब्धियों का मूल्यांकन भी इसी कसौटी पर होना चाहिए—कितने नियुक्ति-पत्र बांटे गए, इससे आगे बढ़कर कितने स्थायी रोजगार बने, कितने युवाओं की आय बढ़ी और कितने युवाओं को अपने घर से दूर जाने की मजबूरी खत्म हुई।
क्योंकि अंततः किसी भी प्रदेश की तरक्की का सबसे बड़ा प्रमाण उसकी इमारतें नहीं, उसके युवाओं के चेहरे पर दिखाई देने वाला भविष्य का भरोसा होता है।

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