लखनऊ। उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की सम्मिलित अवर अधीनस्थ सेवा (स्नातक स्तरीय) मुख्य परीक्षा में सामने आए हाईटेक नकल कांड की जांच का दायरा बढ़ता जा रहा है। लखनऊ के महानगर स्थित दयानंद कन्या इंटर कॉलेज परीक्षा केंद्र पर सिम-बेस्ड ब्लूटूथ डिवाइस के जरिए नकल करते पकड़े गए प्रयागराज निवासी अभ्यर्थी बृजेश कुमार यादव के बाद अब नकल नेटवर्क से जुड़े रमेश चंद्र पटेल की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई है। मामले में पूछताछ के बाद नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी जांच के घेरे में आ गई है।
अंडरवियर में छिपाकर परीक्षा केंद्र पहुंचाया डिवाइस
रविवार को आयोजित मुख्य परीक्षा के दौरान यूपी एसटीएफ को सूचना मिली थी कि महानगर क्षेत्र के सेक्टर-सी स्थित दयानंद कन्या इंटर कॉलेज केंद्र पर एक अभ्यर्थी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण के जरिए नकल कर रहा है। सूचना पर एसटीएफ ने स्थानीय पुलिस और परीक्षा केंद्र के अधिकारियों के सहयोग से कार्रवाई करते हुए प्रयागराज के अल्लापुर निवासी बृजेश कुमार यादव को परीक्षा के दौरान पकड़ लिया।
तलाशी में उसके पास से सिम-बेस्ड ब्लूटूथ डिवाइस, मोबाइल फोन, प्रवेश पत्र, पहचान पत्र, ओएमआर शीट और मूल प्रश्नपत्र बरामद किया गया। एसटीएफ के अनुसार इलेक्ट्रॉनिक उपकरण को परीक्षा केंद्र के भीतर ले जाने के लिए विशेष तरीके से तैयार की गई बनियान का इस्तेमाल किया गया था। डिवाइस को अंडरवियर में छिपाकर परीक्षा कक्ष तक पहुंचाया गया था।
10 लाख रुपये में हुआ था कथित सौदा
पूछताछ के दौरान बृजेश कुमार यादव ने प्रयागराज निवासी रमेश चंद्र पटेल का नाम बताया। आरोप है कि परीक्षा में नकल कराने के लिए दोनों के बीच 10 लाख रुपये में सौदा हुआ था। योजना के तहत परीक्षा केंद्र के बाहर मौजूद व्यक्ति इलेक्ट्रॉनिक उपकरण के माध्यम से अभ्यर्थी को प्रश्नों के उत्तर उपलब्ध कराने वाला था।
पूछताछ में बृजेश ने कथित तौर पर बताया कि डिवाइस को परीक्षा केंद्र के अंदर ले जाने के लिए उसे विशेष जेब वाली बनियान उपलब्ध कराई गई थी। उसने रमेश चंद्र पटेल को 10 लाख रुपये एडवांस देने की बात भी बताई। हालांकि रकम के लेन-देन और पूरे नेटवर्क की पुष्टि के लिए जांच एजेंसी अब इलेक्ट्रॉनिक और वित्तीय साक्ष्यों को खंगाल रही है।
महानगर थाने में दर्ज हुआ मुकदमा
एसटीएफ की कार्रवाई के बाद बृजेश कुमार यादव के खिलाफ लखनऊ के महानगर थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया है। उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 61 और 318 तथा उत्तर प्रदेश सार्वजनिक परीक्षा अधिनियम-2024 की धारा 11 के तहत कार्रवाई की गई है।
जांच एजेंसी अब गिरफ्तार आरोपियों के मोबाइल फोन, कॉल डिटेल, बैंक खातों और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच कर रही है। इसके साथ ही परीक्षा से पहले आरोपियों के संपर्क में रहे लोगों की जानकारी भी जुटाई जा रही है।
पूर्व परीक्षा नियंत्रक विधान जायसवाल का नाम चर्चा में
हाईटेक नकल कांड की जांच के बीच पूर्व परीक्षा नियंत्रक विधान जायसवाल का नाम भी चर्चा में आने से मामला और संवेदनशील हो गया है। विधान जायसवाल पूर्व में उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग में परीक्षा नियंत्रक के पद पर तैनात रह चुके हैं। वर्तमान में वह कानपुर देहात के मुख्य विकास अधिकारी के पद पर तैनात हैं।
होटल में ठहरने और ‘सेटिंग’ की चर्चा, पुष्टि नहीं
इसी बीच सूत्रों के हवाले से यह दावा भी किया जा रहा है कि विधान जायसवाल कानपुर देहात के होटल फर्न में ठहरे हुए हैं और एसटीएफ की कार्रवाई से बचने के लिए अपने स्तर से संपर्क साधने का प्रयास कर रहे हैं।
पूछताछ में खुल सकती है पूरे नेटवर्क की परत
रमेश चंद्र पटेल की गिरफ्तारी के बाद अब जांच एजेंसी के सामने सबसे बड़ा सवाल कथित नकल नेटवर्क की वास्तविक पहुंच को लेकर है। बृजेश और रमेश से पूछताछ में यह पता लगाने का प्रयास किया जाएगा कि इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस की व्यवस्था किसने की, परीक्षा केंद्र के बाहर उत्तर उपलब्ध कराने की योजना में कौन लोग शामिल थे और 10 लाख रुपये के कथित लेन-देन में किन लोगों की भूमिका थी।
एसटीएफ मोबाइल कॉल, बैंक लेन-देन, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस, संपर्क सूत्रों और परीक्षा से पहले की गतिविधियों की जांच के जरिए नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है। जांच में यदि अन्य लोगों की भूमिका सामने आती है तो आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
हाईटेक नकल के इस मामले ने प्रतियोगी परीक्षाओं में इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की रोकथाम और परीक्षा केंद्रों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। अब जांच के आगे बढ़ने के साथ यह साफ होगा कि यह मामला एक अभ्यर्थी तक सीमित था या इसके पीछे प्रतियोगी परीक्षाओं में सक्रिय कोई बड़ा नकल नेटवर्क काम कर रहा था।
जब इस संदर्भ में कानपुर देहात सीडीओ विधान जायसवाल से बात की गई तो उन्होंने बताया कि मैं किसी को नहीं जानता हूं मुझे इस मामले में किसी से कोई लेना-देना नहीं है लेकिन यहां बताना जरूरी है कि अगर कानपुर देहात के होटल फेर्न की बात की जाए तो एक व्यक्ति ने नाम न छापने की छत पर बताया कई लोगों के पास उनके साथ के सीसीटीवी फुटेज भी हाथ लगे हैं।


