दलित सदियों से जातिवाद का शिकार रहे
आरक्षण विरोधियों को संरक्षण न दें
लखनऊ। बसपा सुप्रीमो मायावती ने आर्थिक आधार पर आरक्षण की मांग को लेकर आरक्षण विरोधी आंदोलन पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि दलित और वंचित समाज सदियों से जातिगत भेदभाव और सामाजिक उत्पीड़न का शिकार रहा है। ऐसे में केवल आर्थिक आधार पर आरक्षण की नई मांग सामाजिक वास्तविकता को नजरअंदाज करने वाली है।
मायावती ने रविवार को कहा कि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग को लंबे समय तक जातिगत भेदभाव झेलना पड़ा है। इसी सामाजिक असमानता को दूर करने के लिए संविधान में आरक्षण की व्यवस्था की गई। उन्होंने आर्थिक आधार पर आरक्षण की मांग को अनुचित बताते हुए कहा कि गरीबी दूर करने के लिए सरकारों को अपनी योजनाओं और बजट का लाभ जरूरतमंदों तक पहुंचाना चाहिए।
उन्होंने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी पर भी निशाना साधा। मायावती ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी दिल्ली में धरने के मुद्दे पर सक्रिय रहे, लेकिन जंतर-मंतर पर चल रहे आरक्षण विरोधी प्रदर्शन को खत्म कराने या प्रदर्शनकारियों से बातचीत करने नहीं पहुंचे। उन्होंने इसे कांग्रेस की आरक्षण नीति को लेकर गंभीर सवाल बताया।
बसपा प्रमुख ने केंद्र और राज्य सरकारों से अपील की कि आरक्षण विरोधी गतिविधियों को किसी भी प्रकार का संरक्षण या राजनीतिक शरण नहीं मिलनी चाहिए। उन्होंने राजनीतिक दलों को भी आरक्षण जैसे संवेदनशील मुद्दे पर राजनीतिक लाभ के लिए बयानबाजी करने से बचने की नसीहत दी।
मायावती ने कहा कि सरकारी योजनाओं का लाभ गरीबों तक नहीं पहुंचना आरक्षण की विफलता नहीं, बल्कि व्यवस्था की कमजोरी और भ्रष्टाचार का परिणाम है। उन्होंने सरकारों से गरीबी और सामाजिक असमानता दूर करने के लिए योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर देने को कहा।
दिल्ली के जंतर-मंतर पर 21 अगस्त को हुए प्रदर्शन में प्रदर्शनकारियों ने जाति आधारित आरक्षण व्यवस्था में बदलाव और आर्थिक आधार पर आरक्षण की मांग उठाई थी। इस प्रदर्शन के बाद आरक्षण को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। मायावती का ताजा बयान इसी विवाद के बीच आया है और इसे बसपा की सामाजिक न्याय की राजनीति को फिर मजबूती से सामने रखने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।


