19 जिले प्रभावित; काशी में घाट डूबे तो प्रयागराज में सड़क पर अंतिम संस्कार
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में मानसूनी बारिश और नदियों के बढ़ते जलस्तर से बाढ़ का संकट गहराता जा रहा है। प्रदेश के 19 जिले बाढ़ की चपेट में हैं, जबकि 92 गांवों में फसलें जलमग्न हो चुकी हैं और 26 गांवों का संपर्क दूसरे इलाकों से कट गया है। प्रभावित क्षेत्रों में नाव और मोटर बोट के जरिए राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है।
बाराबंकी में सरयू नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। रामसनेहीघाट क्षेत्र के पांच गांवों में करीब 1,250 लोग बाढ़ से प्रभावित हैं और ग्रामीणों के आवागमन का मुख्य साधन नाव बनी हुई है। बदायूं में गंगा और रामगंगा के उफान से निचले इलाकों में खतरा बढ़ गया है। कदमनगला गांव में पानी पहुंचने के बाद कुछ ग्रामीण अपने मकानों को तोड़कर ईंटें सुरक्षित स्थान पर ले जाने में जुटे हैं।
वाराणसी में गंगा का जलस्तर बढ़ने से घाटों की सीढ़ियां डूब गई हैं। अस्सी घाट पर ‘सुबह-ए-बनारस’ का मंच पानी में समा गया है। घाट किनारे कई छोटे-बड़े मंदिर भी जलमग्न हैं। दशाश्वमेध घाट की जल पुलिस चौकी तक पानी पहुंच गया है। वहीं, प्रयागराज में गंगा और यमुना के बढ़ते जलस्तर के कारण दारागंज घाट की सीढ़ियां डूब गई हैं, जिसके चलते कुछ लोगों को सड़क पर अंतिम संस्कार करना पड़ रहा है।
कानपुर में गंगा और पांडु नदी का जलस्तर बढ़ने से निचले इलाकों की बस्तियों में पानी पहुंच गया है। करीब दो हजार लोगों के प्रभावित होने की जानकारी है। वाराणसी में वरुणा नदी का पानी रिहाइशी कॉलोनियों तक पहुंच गया है। संतकबीर नगर में सरयू की बाढ़ से 20 गांव प्रभावित हैं और नौ परिषदीय विद्यालयों में पानी भरने से 800 से अधिक बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हुई है।
शाहजहांपुर में बारिश के बाद रविवार सुबह अगस्त में ही घना कोहरा छा गया। कलान और आसपास के क्षेत्रों में दृश्यता 50 मीटर से भी कम रही, जिससे वाहन चालकों को परेशानी हुई। मेरठ में सुबह से रुक-रुककर बारिश जारी रही, जबकि गाजीपुर समेत कई जिलों में भी बारिश और जलभराव की स्थिति बनी हुई है।
मौसम विभाग ने रविवार को प्रदेश के 58 जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश की संभावना जताई है, जबकि छह जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक मानसूनी सिस्टम के उत्तर की ओर सक्रिय रहने और बंगाल की खाड़ी से नमी भरी हवाएं आने के कारण अगले एक-दो दिन बारिश का सिलसिला तेज रह सकता है। 25 अगस्त से पश्चिमी हवाओं के प्रभाव से पश्चिमी और मध्य उत्तर प्रदेश में भारी बारिश की गतिविधियां कम होने की संभावना है, जबकि पूर्वी उत्तर प्रदेश में बारिश जारी रह सकती है।
बाढ़ और बारिश के बीच प्रशासन ने प्रभावित इलाकों में निगरानी बढ़ा दी है। ग्रामीण क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्य के लिए नावों का इस्तेमाल किया जा रहा है। लगातार बढ़ते जलस्तर और कटान के कारण तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता बनी हुई है।


