प्रयागराज। सहायक अभियोजन अधिकारी भर्ती-2025 की प्रारंभिक परीक्षा में आरक्षण व्यवस्था के अनुपालन को लेकर चल रहा विवाद अब इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंच गया है। मामले में उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग ने अपना हलफनामा दाखिल कर चयन प्रक्रिया और आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों की स्थिति स्पष्ट करने का प्रयास किया है।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि प्रारंभिक परीक्षा की मेरिट तैयार करते समय आरक्षण व्यवस्था के नियमों का सही तरीके से पालन नहीं किया गया। याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया कि आरक्षित वर्ग के ऐसे अभ्यर्थी, जिन्होंने सामान्य श्रेणी के अंतिम अभ्यर्थी से अधिक अंक हासिल किए हैं, उन्हें उनकी योग्यता के आधार पर सामान्य श्रेणी में स्थान मिलना चाहिए।
आयोग ने हाईकोर्ट में दाखिल हलफनामे में बताया कि सामान्य श्रेणी के अंतिम अभ्यर्थी से अधिक अंक हासिल करने वाले 321 अन्य पिछड़ा वर्ग, 131 आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग और 43 अनुसूचित जाति के अभ्यर्थी हैं। आयोग के अनुसार अंतिम चयन के समय नियमों और संबंधित विज्ञापन के प्रावधानों के तहत पात्र अभ्यर्थियों को अनारक्षित श्रेणी में समायोजित किया जाएगा।
हालांकि हाईकोर्ट आयोग के इस जवाब से पूरी तरह संतुष्ट नहीं हुआ। अदालत ने यह स्पष्ट करने को कहा कि प्रारंभिक परीक्षा की मेरिट सूची तैयार करते समय सामान्य श्रेणी में केवल अनारक्षित अभ्यर्थियों को रखा गया था या सभी वर्गों के अभ्यर्थियों को उनकी वास्तविक मेरिट के आधार पर शामिल किया गया था।
अदालत ने विशेष रूप से यह जानना चाहा कि सामान्य श्रेणी के अंतिम अभ्यर्थी से अधिक अंक पाने वाले 321 अन्य पिछड़ा वर्ग और 43 अनुसूचित जाति के अभ्यर्थियों को प्रारंभिक परीक्षा की सूची में किस श्रेणी में रखा गया है। आयोग से इस संबंध में स्पष्ट जानकारी मांगी गई है।
मामले में पंकज कुमार वर्मा समेत तीन याचियों ने याचिका दाखिल की है। याचियों की ओर से अधिवक्ता अनुराग त्रिपाठी ने पक्ष रखा। आयोग की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनूप त्रिवेदी और अधिवक्ता अवनीश त्रिपाठी ने पक्ष रखा।
आरक्षण और मेरिट से जुड़े इस मामले पर अभ्यर्थियों की नजरें टिकी हुई हैं। 25 अगस्त को सुबह 10 बजे मामले की अगली सुनवाई होने की जानकारी दी गई है। हालांकि न्यायालय की अगली सुनवाई की तारीख को अंतिम रूप से प्रकाशित करने से पहले ताजा न्यायालयीय सूची से मिलान करना उचित होगा।


