लखनऊ: बहुजन समाज पार्टी (BSP) की राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती (Mayawati) ने वंदे मातरम के गायन को लेकर देश में चल रही राजनीतिक बहस पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम को लेकर इस समय देश में जिस तरह की राजनीति हो रही है, वह ठीक नहीं है। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने मानसून सत्र में वंदे मातरम गीत के गायन को लेकर कानून पास किया है। इसके तहत गीत के केवल दो छंद गाने के बजाय सभी छंदों का गायन अनिवार्य किया गया है।
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर पहली बार लाल किले पर पूरा वंदे मातरम गीत गाया गया। वहीं, दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में भी पूरा गीत गाए जाने को लेकर विवाद सामने आया। कांग्रेस मुख्यालय में वंदे मातरम के दो छंद पूरे होने के बाद आगे के छंद भी गाए जाने लगे थे, जिस पर सोनिया गांधी ने आपत्ति जताई। इसका वीडियो सामने आने के बाद भाजपा ने कांग्रेस को निशाने पर लिया और इसे राष्ट्र का अपमान करार दिया।
मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि देश में इस बात को लेकर राजनीति हो रही है कि वंदे मातरम पूरा गाया जाए, शुरुआती दो छंद गाए जाएं या इसे न गाया जाए। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर राजनीति करना ठीक नहीं है। बसपा सुप्रीमो ने कहा कि वंदे मातरम के गायन को लेकर हाल ही में संसद में पारित किया गया कानून पहली बार नहीं है।
उनके मुताबिक केंद्र और राज्यों में सत्ता परिवर्तन के दौरान राजनीतिक दल अपने राजनीतिक स्वार्थ या फायदे के लिए तथा अपनी कमियों से जनता का ध्यान हटाने के लिए इस तरह के कदम उठाते रहे हैं। मायावती ने कहा कि सत्ता परिवर्तन के बाद राजनीतिक दल एक-दूसरे के बनाए कानूनों में बदलाव करते रहते हैं। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में देश और जनहित के मुद्दों पर ध्यान देने की जरूरत है।
उन्होंने बेरोजगार युवाओं, छात्र-छात्राओं, ‘जेन-जी’ और स्कूली बच्चों की ‘जेन-अल्फा’ से जुड़े मुद्दों का उल्लेख किया। इसके साथ ही देश के कुछ हिस्सों में आई भयंकर बाढ़ से हो रही जान-माल की हानि को भी महत्वपूर्ण मुद्दा बताया। मायावती ने केंद्र और सभी राज्य सरकारों के साथ राजनीतिक दलों से इन मुद्दों पर समुचित ध्यान देने की अपील की। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में देश और जनहित में यही सबसे जरूरी मांग है।


