बोले- मीडिया की मनगढ़ंत कहानी
अयोध्या। राम मंदिर निर्माण और चढ़ावा चोरी के विवाद के बीच पूर्व आईएएस नृपेंद्र मिश्र और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के पूर्व महासचिव चंपत राय के बीच मतभेद खुलकर सामने आते दिख रहे हैं। चंपत राय के नौ पन्नों के पत्र में नृपेंद्र मिश्र की कार्यशैली और फैसलों पर सवाल उठाए जाने के बाद शुक्रवार को अयोध्या पहुंचे मिश्र ने आरोपों को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी।
मीडिया के सवालों पर नृपेंद्र मिश्र ने कहा कि उन्होंने ऐसा कोई पत्र नहीं देखा है। पत्र देखे बिना आरोपों पर प्रतिक्रिया देने से इनकार करते हुए उन्होंने कहा कि यह मीडिया की मनगढ़ंत कहानी हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसा लगता है कि मीडिया विवाद पैदा करना चाहता है। मिश्र ने कहा कि पत्र नौ पन्नों का हो सकता है, लेकिन उन्हें नहीं लगता कि चंपत राय ने उसमें इस तरह उनकी आलोचना की होगी।
दरअसल, चंपत राय के सामने आए पत्र में निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र की भूमिका पर कई सवाल उठाए गए हैं। पत्र में आरोप लगाया गया कि मिश्र ने निर्माण समिति में अपनी पसंद के लोगों को शामिल किया और कई मामलों में समिति के सदस्यों के सुझावों की अनदेखी कर अपने फैसलों को प्राथमिकता दी।
चंपत राय ने पत्र में कहा कि मंदिर निर्माण के लिए लार्सन एंड टुब्रो को जिम्मेदारी देने और निर्माण से जुड़ी अन्य एजेंसियों के चयन में नृपेंद्र मिश्र की अहम भूमिका रही। उन्होंने यह भी दावा किया कि समिति में शामिल कुछ लोग छह साल में केवल एक-दो बार ही अयोध्या आए, जबकि पूर्व एनबीसीसी अध्यक्ष अनूप मित्तल लगातार बैठकों में शामिल होते रहे।
चढ़ावा चोरी के बाद बढ़ी तकरार
राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी का मामला सामने आने के बाद विवाद गहराया है। चंपत राय ने 26 जून को महासचिव पद से इस्तीफा दिया था, जिसे छह जुलाई को ट्रस्ट की बैठक में मंजूर कर लिया गया। इसके बाद सामने आए पत्र ने मंदिर निर्माण और ट्रस्ट की कार्यप्रणाली को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
चंपत राय ने पत्र में मंदिर निर्माण से लेकर श्रद्धालुओं की दर्शन व्यवस्था और ट्रस्ट के वित्तीय लेन-देन तक कई बिंदुओं का उल्लेख किया है। उन्होंने दावा किया कि ट्रस्ट के बैंक खातों में भुगतान बैंक हस्तांतरण के माध्यम से किए जाते हैं और नकद भुगतान नहीं होता। वित्तीय लेन-देन का आंतरिक और वैधानिक लेखा परीक्षण भी कराया जाता है।
विवाद के बीच नृपेंद्र मिश्र के बयान ने दोनों वरिष्ठ पदाधिकारियों के बीच मतभेद की चर्चाओं को और हवा दे दी है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि चंपत राय के पत्र में लगाए गए आरोपों पर ट्रस्ट की ओर से कोई औपचारिक जवाब आता है या नहीं।


