लखनऊ। निषाद समुदाय को अन्य पिछड़ा वर्ग की सूची से अनुसूचित जाति की सूची में शामिल करने की मांग को लेकर प्रदेश सरकार के मंत्री और निषाद पार्टी के अध्यक्ष संजय निषाद ने एक बार फिर अपना रुख स्पष्ट किया है। उन्होंने निषाद समाज को आरक्षण देने की मांग दोहराते हुए जरूरत पड़ने पर मंत्री पद छोड़ने और धरने पर बैठने तक की चेतावनी दी है।
संजय निषाद ने कहा कि “मंत्री पद ले लो, लेकिन निषाद समाज को आरक्षण दे दो।” उनके इस बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में आरक्षण का मुद्दा फिर चर्चा में आ गया है। निषाद समुदाय लंबे समय से अपनी सामाजिक और आर्थिक स्थिति के आधार पर अनुसूचित जाति की सूची में शामिल किए जाने की मांग करता रहा है।
संजय निषाद ने कहा कि समाज के हितों और आरक्षण के मुद्दे पर वह पीछे हटने वाले नहीं हैं। उन्होंने संकेत दिया कि यदि सरकार की ओर से मांग पर ठोस पहल नहीं होती है तो वह आंदोलन का रास्ता अपना सकते हैं।
निषाद समुदाय के आरक्षण को लेकर संजय निषाद का यह रुख ऐसे समय सामने आया है जब प्रदेश में आगामी चुनावी राजनीति की तैयारियां तेज होने लगी हैं। राजनीतिक गलियारों में उनके बयान को चुनाव से पहले निषाद मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति के तौर पर भी देखा जा रहा है।
हालांकि, निषाद समुदाय को अनुसूचित जाति की सूची में शामिल करने का मुद्दा नया नहीं है। संजय निषाद और उनकी पार्टी लंबे समय से इसे प्रमुख राजनीतिक मांग के रूप में उठाते रहे हैं। चुनाव से पहले इस मांग को जोर-शोर से उठाने को लेकर राजनीतिक दलों के बीच भी चर्चा तेज हो जाती है।
संजय निषाद ने स्पष्ट किया कि उनके लिए मंत्री पद से ज्यादा महत्वपूर्ण समाज का आरक्षण का अधिकार है। उन्होंने सरकार को संदेश देते हुए कहा कि यदि समाज को उसका अधिकार मिलता है तो वह किसी भी पद की परवाह नहीं करेंगे।


