– करीब छह साल पांच महीने बाद आया बहुचर्चित दोहरे हत्याकांड का फैसला।
– अधिवक्ता मंजुल चौबे और उनकी चचेरी बहन सुधा की हत्या के मामले में अदालत ने सुनाई आजीवन कारावास की सजा।
अनुराग तिवारी
औरैया। जिले के बहुचर्चित अधिवक्ता मंजुल चौबे और उनकी चचेरी बहन सुधा चौबे की हत्या के मामले में अदालत ने बुधवार को बड़ा फैसला सुनाया। करीब छह साल पांच महीने से चल रहे इस चर्चित मुकदमे में अदालत ने पूर्व एमएलसी कमलेश पाठक सहित सभी दोषी अभियुक्तों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। फैसले के बाद औरैया से लेकर प्रदेशभर में चर्चित रहे इस मामले में कानूनी प्रक्रिया के एक अहम चरण का समापन हुआ। यह वही मामला है, जिसने 15 मार्च 2020 को औरैया शहर के नारायणपुर मोहल्ले स्थित पंचमुखी हनुमान मंदिर परिसर में हुई गोलीबारी के बाद पूरे प्रदेश का ध्यान अपनी ओर खींचा था। गोलीबारी में अधिवक्ता मंजुल चौबे और उनकी चचेरी बहन सुधा की मौत हो गई थी। घटना के बाद पूर्व एमएलसी कमलेश पाठक समेत कई लोगों को आरोपी बनाया गया था। उपलब्ध पूर्व रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस ने इस मामले में कमलेश पाठक, उनके भाई संतोष पाठक और रामू पाठक समेत कुल 11 लोगों के खिलाफ कार्रवाई की थी।
छह साल से अधिक समय तक चली कानूनी लड़ाई
दोहरे हत्याकांड के बाद मामला लंबे समय तक अदालत में चला। इसी प्रकरण से जुड़े गैंगस्टर एक्ट के मामले में भी विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट पहले फैसला सुना चुकी है। 25 मार्च 2026 को गैंगस्टर मामले में पूर्व एमएलसी कमलेश पाठक को छह वर्ष के कठोर कारावास और एक लाख रुपये अर्थदंड की सजा दी गई थी, जबकि आठ अन्य दोषियों को पांच-पांच वर्ष के कारावास और 50-50 हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया गया था। एक आरोपी अवनीश प्रताप सिंह को साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त किया गया था।
हालांकि, आज का फैसला मूल दोहरे हत्याकांड से संबंधित बताया जा रहा है, जिसमें अदालत ने कमलेश पाठक सहित सभी अभियुक्तों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। फैसले के बाद बढ़ी हलचल ने फैसले को लेकर अदालत परिसर और औरैया में दिनभर चर्चा बनी रही। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए न्यायालय परिसर में सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी रखे जाने की संभावना है। लंबे समय से चल रहे इस मुकदमे के फैसले पर पीड़ित परिवार और स्थानीय लोगों की नजरें टिकी थीं।
मंजुल चौबे अधिवक्ता थे और उनकी चचेरी बहन सुधा की भी इसी घटना में हत्या हुई थी। वर्ष 2020 की इस वारदात ने औरैया की कानून-व्यवस्था और स्थानीय राजनीतिक प्रभाव को लेकर भी कई सवाल खड़े किए थे। छह साल से अधिक समय बाद आए इस फैसले को बहुचर्चित औरैया दोहरे हत्याकांड में न्यायिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है।


