भोपाल: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। रकम दोगुनी करने का झांसा देने वाले SAGA ग्रुप (SAGA Group) से जुड़े सहयोगियों के मुंबई (Mumbai) और भोपाल (Bhopal) स्थित ठिकानों पर टीम ने छापा मारा है। इस दौरान बड़ी संख्या में सोना-चांदी, फॉरेन करंसी और करोड़ों रुपए कैश बरामद किए गए हैं।
ED के अनुसार, SAGA ग्रुप पोंज़ी स्कैम जिसमें लोनी अर्बन मल्टी-स्टेट क्रेडिट एंड थ्रिफ्ट कोऑपरेटिव सोसाइटी (LUCC) और उससे जुड़ी दूसरी कोऑपरेटिव सोसायटियां शामिल हैं, के सिलसिले में, समीर अग्रवाल और उनके साथियों से जुड़ी मुंबई और भोपाल की कई रिहायशी और कमर्शियल जगहों पर PMLA, 2002 के तहत 13 अगस्त से 16 अगस्त तक तलाशी अभियान चलाया।
इस दौरान, कई आपत्तिजनक दस्तावेज, 1.53 करोड़ रुपये नकद, लगभग 35 लाख रुपये की विदेशी मुद्रा, 5.25 करोड़ रुपये की सोने की ज्वेलरी और चांदी की ईंटें (बुलियन) और 9 महंगी गाड़ियां जब्त की गईं। साथ ही, अपराध से हुई कमाई (Proceeds of Crime) के तौर पर 30 करोड़ रुपये से ज़्यादा कीमत के लिस्टेड शेयर और सिक्योरिटीज़, म्यूचुअल फंड, LIC पॉलिसी, बैंक बैलेंस वगैरह को भी फ्रीज़ किया गया।
ईडी ने उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और अन्य राज्यों में पुलिस अधिकारियों की ओर से एलयूसीसी और उससे संबद्ध सहकारी समितियों के समूह के खिलाफ दर्ज कई प्राथमिकी के आधार पर जांच शुरू की थी। आरोप था कि साल 2009 से जनता को समीर अग्रवाल (सागा) समूह प्रवर्तित आवर्ती जमा, सावधि जमा और मासिक आय योजनाओं में निवेश करने के लिए धोखे से प्रेरित किया गया। जनता से वादा किया गया कि तीन से पांच साल में दोगुना या तिगुना उच्च सुनिश्चित रिटर्न दिया जाएगा, साथ ही कार जैसे उपहार भी दिए जाएंगे, जबकि ऐसे रिटर्न को समर्थन देने के लिए कोई वास्तविक अंतर्निहित व्यावसायिक गतिविधि नहीं थी। फर्जी बैंकिंग बुनियादी ढांचे तथा अवास्तविक रिटर्न के वादों का उपयोग करके सागा समूह द्वारा जनता से धोखाधड़ी से 10,000 करोड़ रुपये से अधिक एकत्र किए गए।
लोगों से ज्यादा कैश में पैसे इकट्ठा किए गए और उन्हें रीजनल कैश-चेस्ट के ज़रिए भेजा गया, फिर प्रमोटरों ने शेल कंपनियों और हवाला चैनलों का इस्तेमाल करके देश और विदेश में चल-अचल संपत्तियों में इन्वेस्टमेंट के लिए निकाल लिया। सर्च जांच से पता चला है कि डायरेक्टोरेट द्वारा पहचाने गए ऑपरेटरों द्वारा कंट्रोल की जाने वाली 50 से ज़्यादा ऐसी शेल कंपनियों का एक बड़ा नेटवर्क है।
समीर अग्रवाल, जिसे SAGA ग्रुप का CMD और प्रिंसिपल कंट्रोलर बताया गया है, देश छोड़कर फरार है। ED ने इस मामले में दो अलग-अलग प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर के तहत पहले ही एसेट्स की प्रोविजनल अटैचमेंट की है, ग्रुप के एक खास अधिकारी रवि शंकर तिवारी को 14.07.2026 को PMLA के प्रोविजन के तहत गिरफ्तार किया है, और 24.07.2026 को स्पेशल कोर्ट में प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट फाइल की है। आगे की जांच चल रही है।


