27 C
Lucknow
Monday, August 17, 2026

जेन अल्फा के सवालों में घिरी मध्यप्रदेश की सत्ता

Must read

(पवन वर्मा-विनायक फीचर्स)
मध्यप्रदेश सरकार बड़े-बड़े इन्वेस्टमेंट समिट और ग्लोबल दावों में व्यस्त है। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि राज्य के नौनिहाल बुनियादी जरूरतों के लिए सड़क पर हैं। मध्यप्रदेश में सत्ता के सामने अब एक ऐसी पीढ़ी सवाल लेकर खड़ी हो रही है, जिसने अभी वोट देना भी शुरू नहीं किया है। जेन अल्फा के बच्चे स्कूल की सड़क, बस का किराया और स्कूल की जगह जैसे मुद्दों पर सड़क पर उतर रहे हैं। 15 अगस्त को छतरपुर के चंदला में बच्चों ने मंत्री दिलीप अहिरवार का काफिला रोक दिया। सिरोंज में छात्राएं बढ़े बस किराये के खिलाफ सड़क पर आ गईं और उसी समय उज्जैन में छात्राओं ने स्कूल को दूसरी जगह ले जाने के विरोध में कलेक्ट्रेट घेर लिया। खास बात यह है कि उज्जैन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का गृह जिला है और उज्जैन संभाग की संगठनात्मक जिम्मेदारी भाजपा की प्रदेश महामंत्री लता वानखेड़े के पास है, जो सिरोंज की सांसद भी हैं। यानी जेन अल्फा की आवाज उन इलाकों से आ रही है, जहां सरकार और भाजपा संगठन की सीधी राजनीतिक मौजूदगी है। आज ये बच्चे मतदाता नहीं हैं, मगर कल इनके पास वोट होगा और तब सरकार की आज की संवेदनशीलता या उदासीनता उनके राजनीतिक नजरिये का हिस्सा बन चुकी होगी।
यह घटनाक्रम इसलिए भी गंभीर है क्योंकि बच्चों की नाराजगी किसी राजनीतिक मुद्दे पर नहीं है। वे सत्ता परिवर्तन की मांग नहीं कर रहे। उन्हें किसी नेता से राजनीतिक हिसाब नहीं चाहिए। वे अपनी पढ़ाई से जुड़ी उन जरूरतों की बात कर रहे हैं, जिन्हें पूरा करना शासन व्यवस्था की बुनियादी जिम्मेदारी है। चंदला में बच्चों को सड़क चाहिए तो सिरोंज की छात्राओं को स्कूल आने-जाने का उचित किराया चाहिए। उज्जैन में छात्राओं ने अपने स्कूल को उसी स्थान पर रखने की मांग की। इन तीनों जगहों पर बच्चों को अपनी बात प्रशासन तक पहुंचाने के लिए प्रदर्शन करना पड़ा,ऐसे में यह सवाल सरकार से पूछा जाना चाहिए कि बच्चों की आवाज सड़क तक पहुंचने से पहले शासन की चौखट तक क्यों नहीं पहुंची?
ये बच्चे अपनी तकलीफों से कितने परेशान हो चुके होंगे कि स्वतंत्रता दिवस के दिन जब मंत्री दिलीप अहिरवार का काफिला चंदला से गुजर रहा था,तब स्कूली बच्चों ने काफिला रोककर स्कूल तक पहुंचने वाली सड़क की समस्या बताई। सड़क नहीं होने से बच्चों को होने वाली परेशानी पर मंत्री ने बच्चों की बात सुनी और सड़क बनवाने का आश्वासन दिया। यहां मुद्दा बहुत साफ है। बच्चों को सड़क चाहिए थी और उन्हें अपनी मांग सरकार तक पहुंचाने के लिए मंत्री का काफिला रोकना पड़ा।
अब सवाल यह है कि सड़क की जरूरत का पता प्रशासन को बच्चों के प्रदर्शन के बाद क्यों चला? स्कूल जाने वाले बच्चों की रोज की आवाजाही पर किसी अधिकारी या खुद मंत्री जी,जो वहां के विधायक भी हैं, की नजर क्यों नहीं गई? स्थानीय स्तर पर समस्या का समाधान पहले क्यों नहीं हुआ?
सरकार के लिए आश्वासन देना आसान है और बच्चों के लिए सड़क बनना जरूरी है। आने वाले दिनों में यही तय करेगा कि चंदला के बच्चों की आवाज व्यवस्था तक पहुंची या फिर एक घटना बनकर रह गई।
सिरोंज की घटना में भी कहानी अलग नहीं है। विदिशा जिले के सिरोंज में स्कूली छात्राएं निजी बसों का किराया बढ़ाए जाने के खिलाफ सड़क पर उतरीं। यहां किराया 10 रुपये से बढ़ाकर 25 रुपये कर दिया गया था। बच्चों के लिए रोजाना 25 रुपये का खर्च बड़ी परेशानी था। छात्राओं ने बस स्टैंड पर प्रदर्शन किया और अपनी आवाज उठाई। बाद में बस संचालकों को किराया वापस 10 रुपये करने पर सहमत होना पड़ा।
यहां राजनीतिक संयोग और भी दिलचस्प है। सिरोंज की सांसद लता वानखेड़े भाजपा की प्रदेश महामंत्री हैं। वे संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाल रही हैं। इसी के साथ पार्टी ने उन्हें उज्जैन संभाग का संगठन प्रभारी भी बनाया है। उज्जैन संभाग मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का गृह क्षेत्र है। लता वानखेड़े को उज्जैन संभाग का संगठन प्रभारी बनाए जाने की पुष्टि भाजपा के संगठनात्मक नियुक्तियों से जुड़ी रिपोर्टों में भी हुई है।
अब इन तस्वीरों के राजनीतिक पहलू देखिए।
सिरोंज में जेन अल्फा सड़क पर उतरी। वहां की सांसद लता वानखेड़े प्रदेश भाजपा की महामंत्री हैं। वे उज्जैन संभाग की संगठन प्रभारी भी हैं। उज्जैन में भी जेन अल्फा स्कूल के मुद्दे पर कलेक्ट्रेट पहुंचती है। उज्जैन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का गृह जिला है। यह महज संयोग हो सकता है, मगर राजनी…

Must read

More articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Latest article