लखनऊ। योगी आदित्यनाथ सरकार ने शिक्षा व्यवस्था से जुड़े विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए महत्वपूर्ण पहल की है। सरकारी परिषदीय प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों को स्कूल ड्रेस और जरूरी शैक्षिक सामग्री के लिए आर्थिक सहायता दी जा रही है। वहीं निजी स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों को भी कैशलेस चिकित्सा सुविधा से जोड़ने की दिशा में सरकार ने कदम बढ़ाया है।
सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों को दी जाने वाली सहायता राशि बढ़ाकर 1,200 रुपये प्रति छात्र की गई है। यह धनराशि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण यानी डीबीटी के माध्यम से अभिभावकों के बैंक खातों में पहुंचाई जा रही है। इस राशि से बच्चों के लिए यूनिफॉर्म, जूते-मोजे, स्वेटर और स्टेशनरी जैसी आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराने का उद्देश्य है। सरकार का मानना है कि आर्थिक सहायता सीधे अभिभावकों तक पहुंचने से योजना में पारदर्शिता बढ़ेगी और बच्चों को विद्यालय के लिए जरूरी सामग्री समय पर मिल सकेगी।
इस पहल का असर प्रदेश के बड़ी संख्या में सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों पर पड़ेगा। सरकार की कोशिश है कि आर्थिक स्थिति किसी बच्चे की स्कूली पढ़ाई और आवश्यक सामग्री के रास्ते में बाधा न बने। खास तौर पर ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों के लिए यह सहायता उपयोगी साबित हो सकती है।
इसी क्रम में निजी विद्यालयों में पढ़ाने वाले शिक्षकों को भी कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की तैयारी की जा रही है। निजी स्कूलों से शिक्षकों और कर्मचारियों का विवरण जुटाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। योजना लागू होने पर निजी विद्यालयों में कार्यरत बड़ी संख्या में शिक्षक और उनके आश्रित परिवार इलाज के खर्च के बोझ से राहत पा सकेंगे।
निजी स्कूलों के शिक्षकों के लिए यह पहल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि बड़ी संख्या में शिक्षक निजी संस्थानों में सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन उन्हें सरकारी शिक्षकों के समान स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध नहीं होतीं। गंभीर बीमारी या महंगे इलाज की स्थिति में कैशलेस चिकित्सा सुविधा उनके परिवारों के लिए बड़ी राहत बन सकती है।
सरकार की इन पहलों को शिक्षा व्यवस्था में विद्यार्थियों और शिक्षकों दोनों के हितों को ध्यान में रखते हुए उठाया गया कदम माना जा रहा है। एक तरफ बच्चों को पढ़ाई से जुड़ी जरूरी सामग्री के लिए आर्थिक सहायता मिल रही है, वहीं दूसरी तरफ शिक्षकों को स्वास्थ्य सुरक्षा के दायरे में लाने की कोशिश की जा रही है।
हालांकि निजी स्कूल शिक्षकों के लिए कैशलेस इलाज की सुविधा को लेकर अंतिम रूप से योजना के नियम, पात्रता और क्रियान्वयन की स्थिति स्पष्ट होना अभी जरूरी है। सरकार के स्तर पर प्रक्रिया आगे बढ़ने के बाद इसका वास्तविक लाभ पात्र शिक्षकों तक पहुंच सकेगा।


