लखनऊ। उत्तर प्रदेश में खाद्य पदार्थों में मिलावट और गुणवत्ता मानकों के उल्लंघन को लेकर चिंता बढ़ रही है। खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (फस्साई ) से जुड़े आंकड़ों में उत्तर प्रदेश से बड़ी संख्या में खाद्य नमूनों के मानकों पर खरा नहीं उतरने के मामले सामने आए हैं। हालांकि, अलग-अलग वर्षों में नमूनों की जांच और उल्लंघनों की संख्या बदलती रही है, इसलिए ‘देश में नंबर वन’ का दावा संबंधित रिपोर्ट के वर्ष और आंकड़ों के संदर्भ में ही देखा जाना चाहिए।
दूध, खोया, पनीर, घी और मिठाइयां मिलावट के लिहाज से संवेदनशील खाद्य पदार्थों में शामिल हैं। केंद्र सरकार के मुताबिक खाद्य सुरक्षा विभाग इन उत्पादों की विशेष रूप से सैंपलिंग करता है और त्योहारी सीजन में मिलावट संभावित क्षेत्रों पर विशेष निगरानी रखी जाती है।
उत्तर प्रदेश में खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई के दौरान समय-समय पर नकली या मिलावटी डेयरी उत्पादों के मामले सामने आते रहे हैं। हाल में मथुरा में एक इकाई पर कार्रवाई के दौरान बड़ी मात्रा में कथित नकली पनीर और सिंथेटिक दूध बरामद किए जाने की खबर सामने आई है।
नोएडा-ग्रेटर नोएडा में भी खाद्य नमूनों की जांच में पनीर की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल उठे थे। एक जांच में लिए गए पनीर के 83 प्रतिशत नमूने निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे थे।
वित्त वर्ष 2025-26 में देशभर में 2,23,808 खाद्य नमूनों का विश्लेषण किया गया, जिनमें 40,023 नमूने गैर-अनुरूप पाए गए। यानी जांचे गए नमूनों में करीब हर पांचवां नमूना निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं था।
मध्य प्रदेश में भी खाद्य नमूनों के अधोमानक पाए जाने को लेकर हालिया रिपोर्टों में चिंता जताई गई है। वहीं यूपी में बड़ी संख्या में नमूनों की जांच और कार्रवाई इसे देश के प्रमुख खाद्य-सुरक्षा चुनौती वाले राज्यों में रखती है।
खाद्य पदार्थों में मिलावट का सीधा असर आम उपभोक्ता की सेहत पर पड़ सकता है। ऐसे में खाद्य सुरक्षा विभाग की नियमित सैंपलिंग, प्रयोगशाला जांच और दोषी कारोबारियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई बेहद जरूरी है।


