लखनऊ। उत्तर प्रदेश में ग्रामीण परिवारों को रोजगार उपलब्ध कराने वाली वीबी-जी-रैम-जी योजना को लेकर सामने आए आंकड़े चौंकाने वाले हैं। ग्रामीण विकास विभाग के आंकड़ों पर आधारित रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश में पंजीकृत करीब 1.77 करोड़ जॉब-कार्ड परिवारों में से महज 7,68,550 परिवारों को ही योजना के तहत रोजगार मिल सका।
आंकड़ों के अनुसार यह संख्या कुल जॉब-कार्ड परिवारों की लगभग चार प्रतिशत बैठती है। यानी बड़ी संख्या में जॉब-कार्ड धारक परिवार योजना के तहत रोजगार से वंचित रहे।
ग्रामीण विकास विभाग के उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक उत्तर प्रदेश में करीब 1.77 करोड़ परिवारों के पास जॉब कार्ड हैं। इनमें से 7 लाख 68 हजार 550 परिवारों ने वीबी-जी-रैम-जी योजना के तहत रोजगार प्राप्त किया।
यह आंकड़ा ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार उपलब्ध कराने की योजना के क्रियान्वयन और उसकी पहुंच को लेकर सवाल खड़े करता है। हालांकि, केवल जॉब-कार्ड होना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि प्रत्येक परिवार ने उसी अवधि में रोजगार की मांग की थी।
ग्रामीण रोजगार योजनाओं का उद्देश्य गांवों में जरूरतमंद परिवारों को स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराना और उनकी आय का सहारा बनना है। ऐसे में कुल जॉब-कार्ड परिवारों की तुलना में रोजगार पाने वाले परिवारों की संख्या कम होना योजना की पहुंच और रोजगार की मांग-आपूर्ति के बीच अंतर की ओर संकेत करता है।
वीबी-जी-रैम-जी योजना के तहत रोजगार पाने वाले परिवारों की संख्या को लेकर सामने आए आंकड़ों पर अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कितने परिवारों ने वास्तव में काम की मांग की, कितनों को काम आवंटित हुआ और कितने परिवारों को निर्धारित अवधि में रोजगार उपलब्ध कराया गया।
ग्रामीण विकास विभाग के आंकड़ों पर आधारित यह रिपोर्ट उत्तर प्रदेश में ग्रामीण रोजगार योजनाओं की वास्तविक पहुंच और जमीनी स्थिति पर चर्चा को तेज कर सकती है।


