– दिलीप की मड़ैया और धौली की मड़ैया में दर्द की तस्वीर देख भावुक हुआ माहौल
– बच्चों को बांटा कुक्ड फूड; बेघर परिवारों को आवासीय पट्टे दिलाने के निर्देश
फर्रुखाबाद। गंगा की बाढ़ ने सिर्फ खेतों की मेड़ें और रास्ते नहीं काटे, बल्कि कई परिवारों के सपनों की जमीन भी खिसका दी है। कभी जिन घरों में बच्चों की किलकारियां गूंजती थीं, आज वहां बाढ़ का पानी और कटाव अपना निशान छोड़ गया है। दिलीप की मड़ैया और धौली की मड़ैया में बुधवार को जब जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर पहुंचीं तो ग्रामीणों ने उन्हें अपनी पीड़ा सुनाई।
ग्रामीणों ने बताया कि तेज बहाव के कारण कहीं खेत कट गए तो कहीं आशियानों पर संकट खड़ा हो गया। बाढ़ का पानी उतरने के बाद भी कटाव से पैदा हुआ खतरा और बेबसी उनके चेहरों पर साफ नजर आई। ग्रामीणों की समस्याएं सुनते हुए जिलाधिकारी ने अधिकारियों को तत्काल राहत पहुंचाने के निर्देश दिए।
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने बच्चों को कुक्ड फूड वितरित किया। भोजन पाकर बच्चों के चेहरों पर कुछ देर के लिए मुस्कान लौटी, लेकिन उनके पीछे खड़े परिवारों की चिंता अब भी बरकरार थी। किसी को घर बचाने की चिंता थी तो किसी को खेत और रोजी-रोटी की।
डीएम ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बाढ़ के तेज बहाव और कटाव से जिन ग्रामीणों की भूमि प्रभावित हुई है, उन्हें शासन के नियमानुसार सहायता राशि तत्काल बैंक खातों में उपलब्ध कराई जाए। वहीं जिन परिवारों ने कटाव के कारण अपना आशियाना खो दिया है, उनकी सूची तैयार कर आवासीय पट्टे जारी करने की प्रक्रिया शुरू की जाए।
जिलाधिकारी ने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि संकट की इस घड़ी में प्रशासन उनके साथ खड़ा है। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रभावित परिवार को राहत और सहायता से वंचित नहीं होने दिया जाएगा। खाद्य सामग्री, पेयजल, स्वास्थ्य सुविधाओं सहित जरूरी राहत सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए।
बाढ़ प्रभावित गांवों में सबसे बड़ा संकट सिर्फ पानी नहीं, बल्कि उसके साथ बहती रोजी-रोटी है। किसान की मेहनत से तैयार जमीन जब नदी के कटाव में समा जाती है तो उसके साथ महीनों की मेहनत और परिवार की उम्मीदें भी बह जाती हैं। जिन परिवारों के घर कटाव की चपेट में आए हैं, उनके सामने अब नए आशियाने की चिंता खड़ी है।
प्रशासन की ओर से आवासीय पट्टे और आर्थिक सहायता के निर्देश ऐसे परिवारों के लिए उम्मीद की एक किरण हैं। अब ग्रामीणों की नजर इस बात पर है कि सरकारी मदद कितनी जल्दी उनके दरवाजे तक पहुंचती है।
निरीक्षण के दौरान अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व अरुण कुमार सिंह, उपजिलाधिकारी सदर संजय कुमार, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी विश्वनाथ प्रताप सिंह, तहसीलदार सदर विक्रम सिंह चौहान सहित राजस्व एवं अन्य विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
बाढ़ का पानी शायद धीरे-धीरे उतर जाए, लेकिन जिन घरों की नींव कटाव में हिल गई है, उनके लिए जिंदगी को फिर से खड़ा करना सबसे बड़ी चुनौती है। ऐसे में प्रशासन के भरोसे और मदद की ग्रामीणों को सबसे ज्यादा जरूरत है।


