मशीन खरीदने के नाम पर लिया था 7.60 लाख रुपये का टर्म लोन, फर्जी कोटेशन और मिलीभगत से निजी इस्तेमाल का आरोप
फर्रुखाबाद। मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना के तहत मशीन खरीदकर उद्योग स्थापित करने के लिए स्वीकृत बैंक ऋण की धनराशि के कथित दुरुपयोग के मामले में फतेहगढ़ पुलिस ने दो लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। मामला उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक की कुटरा शाखा से जुड़ा है। बैंक शाखा प्रबंधक की शिकायत पर दर्ज मुकदमे में फर्जी कोटेशन, आपसी मिलीभगत और ऋण की रकम को निजी इस्तेमाल में लेने के आरोप लगाए गए हैं। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
पुलिस को दी गई शिकायत के मुताबिक सिविल लाइंस नई बस्ती तिर्वा कोठी निवासी शिवम यादव ने मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना के अंतर्गत आयरन मिल मशीनिंग परियोजना स्थापित करने के लिए उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक की कुटरा शाखा में करीब 10 लाख रुपये के ऋण के लिए आवेदन किया था।
बैंक की ओर से 26 सितंबर 2025 को शिवम यादव के पक्ष में 7.60 लाख रुपये का टर्म लोन तथा 19 हजार रुपये कैश क्रेडिट स्वीकृत किया गया था। योजना के तहत मशीन खरीदने के लिए स्वीकृत धनराशि में से करीब आठ लाख रुपये पांच प्रतिशत मार्जिन सहित आरटीजीएस के माध्यम से मेसर्स श्री सिद्धि विनायक इंटरप्राइजेज के खाते में भेजे गए।
बैंक की शिकायत में मेसर्स श्री सिद्धि विनायक इंटरप्राइजेज के प्रोपराइटर सुशील कुमार चंदवारिया पर आरोप लगाया गया है कि मशीन उपलब्ध कराने के बजाय ऋण की रकम का कथित तौर पर आपसी मिलीभगत से निजी इस्तेमाल कर लिया गया।
बैंक का कहना है कि ऋण की धनराशि मशीन की खरीद के लिए जारी की गई थी, लेकिन निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार मशीन खरीदने के बाद उससे संबंधित बिल, वाउचर और अन्य आवश्यक दस्तावेज बैंक में प्रस्तुत नहीं किए गए।
शिकायत के अनुसार बैंक अधिकारियों ने शिवम यादव और सुशील कुमार चंदवारिया से कई बार संपर्क किया। दोनों को मौखिक और लिखित रूप से सूचना देने के साथ ही नोटिस भी भेजे गए। इसके बावजूद बैंक को मशीन खरीद से संबंधित बिल-वाउचर उपलब्ध नहीं कराए गए और न ही ऋण की धनराशि वापस जमा कराई गई।
बैंक ने आरोप लगाया है कि फर्जी कोटेशन और आपसी साजिश के माध्यम से बैंक से ऋण स्वीकृत कराया गया तथा मशीन खरीद के लिए जारी रकम का कथित रूप से दुरुपयोग किया गया। इससे बैंक को आर्थिक नुकसान पहुंचने की बात शिकायत में कही गई है।
मामले में बैंक शाखा प्रबंधक की ओर से 14 मई 2026 को पुलिस अधीक्षक को रजिस्टर्ड डाक के माध्यम से शिकायत भेजी गई थी। आरोप है कि शिकायत के बावजूद तत्काल कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद बैंक की ओर से एसीजेएम कोर्ट में याचिका दायर की गई।
कोर्ट के आदेश के बाद फतेहगढ़ पुलिस ने मामले में मुकदमा दर्ज कर लिया। पुलिस अब ऋण आवेदन, कोटेशन, बैंक खाते में भेजी गई रकम, आरटीजीएस लेनदेन, मशीन खरीद से संबंधित दस्तावेज और संबंधित लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक मुकदमा दर्ज कर मामले की विवेचना शुरू कर दी गई है। जांच के दौरान बैंक रिकॉर्ड, ऋण से जुड़े दस्तावेज और संबंधित खातों के लेनदेन की पड़ताल की जाएगी। आरोपों की पुष्टि और मामले में वास्तविक रूप से कितनी धनराशि का दुरुपयोग हुआ, यह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
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