शमसाबाद, फर्रुखाबाद। गंगा नदी के लगातार बढ़ते जलस्तर और तेज कटान ने शमसाबाद क्षेत्र की कटरी में तबाही मचा रखी है। गंगा का जलस्तर बढ़ने के साथ कटान की रफ्तार भी तेज होती जा रही है। हालात ऐसे हैं कि कहीं ग्रामीण अपने घरों से सामान समेटकर सुरक्षित और ऊंचे स्थानों की ओर पलायन करने की तैयारी कर रहे हैं तो कहीं लोग अपने ही हाथों से वर्षों की मेहनत से बनाए आशियाने को तोड़ने के लिए मजबूर हो गए हैं।
कटरी क्षेत्र में गंगा का कटान ग्रामीणों के लिए महज प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि उनकी जिंदगी भर की कमाई और सपनों को निगलने वाला संकट बन गया है। सबसे दर्दनाक तस्वीर कटरी तौफीक में सामने आई, जहां गंगा की कटान की जद में आए घरों को बचाने की उम्मीद टूटने के बाद परिवारों ने खुद ही अपने मकानों को तोड़ना शुरू कर दिया।
कटरी तौफीक में जोधराम और विनोद के मकान कई दिनों से गंगा की कटान की चपेट में थे। देखते ही देखते पानी उनके घरों के दरवाजे तक पहुंच गया। कटान की रफ्तार बढ़ी तो दोनों परिवारों को अंदाजा हो गया कि यदि मकान को तत्काल नहीं तोड़ा गया तो कुछ ही समय में पूरा आशियाना गंगा की धारा में समा सकता है। इसके बाद दोनों परिवारों ने भारी मन से अपने हाथों में हथौड़ा उठा लिया। जिन दीवारों को उन्होंने वर्षों की मेहनत और जमा पूंजी से खड़ा किया था, उन्हीं दीवारों पर हथौड़े चलाते समय उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े। अपने ही घर को अपने हाथों से टूटता देख परिवारों की बेबसी साफ नजर आई।
इस मार्मिक दृश्य को देखकर आसपास मौजूद पड़ोसी भी मायूस हो गए। ग्रामीणों ने बताया कि इस बार गंगा का कटान बेहद तेज है। कई स्थानों पर रातों-रात जमीन दरक रही है और देखते ही देखते खेत तथा मकान कटान की भेंट चढ़ रहे हैं।
ग्रामीणों के अनुसार अचानकपुर, कटरी तौफीक, चंपातपुर, भुलबुलापुर, अजीजाबाद, नगरिया जैतपुर, केलियाई, समेचीपुर, पैलानी दक्षिण, कमथरी, बांसखेड़ा सहित करीब दो दर्जन गांव बाढ़ और कटान की चपेट में हैं। इन गांवों में रहने वाले लोगों को लगातार अपने घर और खेतों की चिंता सता रही है।
पैलानी दक्षिण में स्थिति और भी भयावह बताई जा रही है। ग्रामीणों के अनुसार अब तक करीब एक दर्जन मकान, झोपड़ियां और प्रधानमंत्री आवास तक गंगा के तेज कटान में समा चुके हैं। इसके साथ ही किसानों की तैयार फसलें और कृषि भूमि भी कटान की भेंट चढ़ रही हैं।
कटरी तौफीक के ग्रामीणों का कहना है कि यदि कटान की यही रफ्तार अगले दो-तीन दिनों तक जारी रही तो कई और मकान गंगा की धारा में समा सकते हैं। लोगों में भय का माहौल है और ग्रामीण रात के समय भी अपने घरों और जमीन की निगरानी करने को मजबूर हैं।
वहीं सुल्तानगंज खरेटा से कमथरी जाने वाला मार्ग भी जलमग्न हो गया है। सड़क पर पानी भरने के कारण ग्रामीणों को आवागमन के लिए नाव का सहारा लेना पड़ रहा है। इसके अलावा ढाईघाट-वाजिदपुर मार्ग पर भी बाढ़ का पानी भर जाने से आवागमन प्रभावित हो गया है।
बाढ़ और कटान की गंभीर होती स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने भी तैयारियां तेज कर दी हैं। एसडीएम अभिषेक वर्मा ने समेचीपुर चितार, गुटैटी दक्षिण और कमथरी क्षेत्र का दौरा कर बाढ़ के हालात का जायजा लिया। उन्होंने मौके पर ग्रामीणों से बातचीत कर उनकी समस्याएं जानीं और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। इसके बाद एसडीएम ने शमसाबाद में बनाए गए शरणालयों और बाढ़ कंट्रोल रूम का भी निरीक्षण किया।
कटरी के ग्रामीणों का दर्द प्रशासनिक व्यवस्थाओं से आगे बढ़कर स्थायी समाधान की मांग तक पहुंच गया है। ग्रामीणों का कहना है कि हर वर्ष बाढ़ आती है और उनके खेत, फसल, मकान तथा जमीन का बड़ा हिस्सा अपने साथ बहा ले जाती है। बड़ी मुश्किल से लोग अपने जीवन को दोबारा पटरी पर लाते हैं, लेकिन अगले वर्ष फिर बाढ़ और कटान उनकी मेहनत पर पानी फेर देती है।
विनाशकारी बाढ़ का कहर: कहीं सामान समेटने की तैयारी, तो कहीं अपने ही आशियाने पर चल रहे हथौड़े


