सीतापुर के मिड-डे-मील का मुद्दा भी गूंजा
नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र का गुरुवार का दिन भी लगातार हंगामे, तीखी नोकझोंक और शोर-शराबे के नाम रहा। लोकसभा और राज्यसभा में विपक्ष के विरोध के बीच कार्यवाही बार-बार स्थगित करनी पड़ी। इसी दौरान राज्यसभा में संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू और नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के बीच तीखी बहस ने राजनीतिक माहौल गर्मा दिया। खड़गे ने नाराजगी जताते हुए साफ कहा, “मुझे संसद के नियम मत सिखाइए।”
हंगामे के बावजूद संसद ने महत्वपूर्ण विधायी कामकाज भी निपटाया। लोकसभा ने विपक्ष की नारेबाजी के बीच कराधान तथा अन्य विधियां संशोधन विधेयक-2026 ध्वनिमत से पारित कर दिया, जबकि राज्यसभा ने इस पर चर्चा के बाद इसे लोकसभा को लौटा दिया। इसके अलावा विनियोग (संख्या-3) विधेयक-2026 भी राज्यसभा से पारित हो गया, जिससे वित्त वर्ष 2022-23 में निर्धारित राशि से अधिक हुए 54,067 करोड़ रुपये के सरकारी व्यय को संसदीय मंजूरी का रास्ता साफ हो गया।
राज्यसभा में शून्यकाल के दौरान हंगामा उस समय और बढ़ गया जब किरेन रिजिजू ने सदन की कार्यवाही और नियमों को लेकर टिप्पणी की। इस पर नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कड़ा विरोध जताते हुए कहा कि उन्हें संसद की कार्यप्रणाली सिखाने की आवश्यकता नहीं है। दोनों नेताओं के बीच हुई तीखी नोकझोंक के कारण सदन की कार्यवाही कई बार स्थगित करनी पड़ी।
इसी बीच आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने उत्तर प्रदेश के सीतापुर में सामने आए मध्याह्न भोजन के कथित वीडियो का मुद्दा उठाते हुए कहा कि बच्चों को परोसी गई सब्जी में केवल पानी दिखाई दे रहा था। उन्होंने सरकार से जवाब मांगा, लेकिन उपसभापति हरिवंश ने नियमों का हवाला देते हुए उन्हें रोक दिया। इसके बावजूद विपक्ष ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरने का प्रयास जारी रखा।
प्रश्नकाल के दौरान राष्ट्रीय जनता दल के सांसद प्रो. मनोज झा ने न्यायाधीशों की नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर सरकार से सवाल किए, जिसका जवाब विधि एवं न्याय राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने दिया। हालांकि पूरे दिन विपक्ष की नारेबाजी जारी रहने से सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से नहीं चल सकी।
लगातार व्यवधानों के बीच दोनों सदनों की कार्यवाही कई बार स्थगित होती रही और अंततः लोकसभा तथा राज्यसभा की बैठक 7 अगस्त सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। संसद का दिन एक बार फिर राजनीतिक टकराव, विपक्ष के विरोध और आवश्यक विधायी कार्यों के बीच समाप्त हुआ।


