सांसदो और विधायकों की पेंशन खत्म करने के लिए आगे आएं युवा
केन्द्रीय मंत्रियो की संपत्ति की हो जांच, उनकी शान शौकत के खर्च पर हो कटौती
शिक्षा और चिकित्सा की जाए फ्री अन्य फिजूल की योजनाये हो बन्द
देश में बडे वैचारिक आन्दोलन की जरूरत
प्रकाश शर्मा (वरिष्ठ पत्रकार)
कन्नौज। बीते 12 सालो से देश का एजेन्डा हिन्दुस्तान-पाकिस्तान, हिन्दू मुस्लिम एवं धार्मिक भावनाओ पर टिका हुआ है। चुनाव उसी पर हो रहे है और राजनीतिक दल पानी की तरह पैसा बहाकर हर तरह से सत्ता पर बने रहने का लक्ष्य बनाए हुए हैं।
अधिकांश सांसद और विधायक करोड़पति हैं और चुनावों में वे निर्धारित की गई धनराशि से कई गुना खर्च करते हैं लेकिन उनपर कोई कार्रवाई नहीं होती। राजनीतिक दलों के पास बीते 12 सालों में अकूत संपत्ति आई है। रैलियों में करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे हैं लेकिन उसकी कोई जांच नहीं हो रही है आखिर क्यों?
इसी के साथ करोड़पति सांसद और विधायक पेंशन लेकर जनता पर बोझ बने हुए हैं।
वैसे सांसदो और विधायकों को जन सेवक और लोक सेवक कहा जाता है लेकिन उन पर सरकारी पैसे का करोड़ो रूपया खर्च होता है। सरकारी तनख्वाह, (वेतन),भत्ता तथा अन्य मदों पर भारी खर्च हो रहा है।
सांसद की पेंशन पर करीब 130 करोड रूपया प्रति साल खर्च हो रहा है।
पूर्व सांसद करीब 3500 एक अनुमान के अनुसार साल मे करीव 3.72 लाख रूपया प्रति पूर्व सांसद को मिलता है।
इसी तरह विधायको की पेंशन पर सभी राज्यों के पूर्व विधायको पर 550 करोड रूपया पेंशन पर सरकार खर्च करती है। यूपी सरकार ने 2025 मे विधायको की पेंशन बढ़ाई जिस पर 105 करोड का अतिरिक्त खर्च का बोझ आया है।
देश की 80 फीसदी जनता 5 किलो फ्री राशन पर जी रही है। इतना ही नही देश के राजनीतिक दलो के नेता चुनाव मे अनाप शनाप धन खर्च कर रहे है। इस पर अंकुश लगाने के लिए कोई ठोस कदम नही उठाया गया है जो चिंताजनक है।
सत्ता मे पहुंचने वाले और चुनाव जीतने वाले अधिकाश सांसद और विधायक करोड़पति है फिर उन्हें पेंशन की जरूर क्यो है और दूसरी बात जब वह लोक सेवक है तो सरकारी पेंशन क्यो?
देश पर एक अनुमान के अनुसार करीब 240 लाख करोड का कर्जा लद चुका है। 12 साल पूर्व 55 लाख करोड का कर्जा था।
देश में शिक्षा और चिकित्सा की व्यवस्था इतनी मंहगी हो गई है कि आम आदमी का इलाज कराना कठिन हो गया है लेकिन आज की युवा पीढी को इस पर गंभीर चिन्तन करने की जरूरत है कि आखिर हम देश को किधर ले जा रहे है। शिक्षा और चिकित्सा को आम आदमी के लिए फ्री करने के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत है।
अभी हाल ही मे नीट पेपर लीक मामले को लेकर युवाओ का आन्दोलन दिखाई दिया जिसमे स्वतः स्फूर्त भीड के अलावा युवाओ मे आक्रोश नजर आया। जो सरकार एक माह तक आन्दो लन करने वाले छात्रो को तब्बजो नही दे रही थी और कहती थी कि यह सरकार कुछ लोगों के आन्दोलन से नही झुकती।
उसी सरकार के एक कद्दावर मंत्री को इस्तीफा देना पडा और मांगे भी मांननी पड़ी। यह देश के युवाओ के जागरण का शुभारंभ है। मेरा मानना है कि सीजेपी के छात्र जिन्होने युवाओ को एक जुट करने में अपनी भूमिका निभाई है बडा आन्दोलन खडा कर सांसदो और विघायको की पेंशन खत्म करने की मांग के साथ शिक्षा और स्वास्थ्य की व्यवस्या फ्री की माँग को उठाने के लिए आगे आये क्योकि युवा ही इस देश का भविष्य है।


