– छात्रों का उबाल, भर्ती परीक्षाओं पर उठे सवाल, अब जिम्मेदार मौन क्यों
सूर्या पंडित
झारखंड/लखनऊ।
सरकारी भर्ती परीक्षाओं को लेकर छात्रों का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। जुलाई 2026 के अंतिम सप्ताह से शुरू हुआ आंदोलन अब लगातार कई दिनों से जारी है। बड़ी संख्या में अभ्यर्थी सड़कों पर उतरकर सरकार और भर्ती आयोगों से जवाब मांग रहे हैं।
प्रदर्शनकारी छात्रों की प्रमुख मांगें हैं कि 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा रद्द की जाए, परीक्षा में कथित गड़बड़ियों और पेपर लीक की CBI जांच कराई जाए, JSSC-CGL सहित अन्य भर्ती परीक्षाओं की निष्पक्ष जांच हो तथा भविष्य की सभी सरकारी भर्तियों में पारदर्शी और समयबद्ध प्रक्रिया सुनिश्चित की जाए।
छात्रों का आरोप है कि भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता नहीं रही, कुछ परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और अन्य अनियमितताएं हुईं तथा योग्य अभ्यर्थियों के साथ अन्याय हुआ है। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक जांच और अंतिम निष्कर्ष संबंधित एजेंसियों द्वारा ही तय किए जाएंगे।
अब बड़ा सवाल यह है— जब अन्य आंदोलनों के दौरान कई राजनीतिक दलों के नेता, सामाजिक कार्यकर्ता और स्वयं को छात्रों का समर्थक बताने वाले लोग खुलकर सड़कों पर दिखाई देते थे, तो झारखंड के इन छात्रों के आंदोलन पर उनकी आवाज़ क्यों नहीं सुनाई दे रही है? क्या छात्रों के समर्थन का पैमाना मुद्दे के आधार पर तय होगा, या फिर सभी अभ्यर्थियों के साथ समान संवेदनशीलता दिखाई जाएगी?


