– 10 साल तक की जेल, 50 लाख जुर्माना
– सख्त कानून को मिली राष्ट्रपति की मंजूरी
नई दिल्ली। देशभर में भर्ती और प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और संगठित नकल के बढ़ते मामलों पर केंद्र सरकार ने अब तक का सबसे बड़ा कानूनी प्रहार किया है। संसद से पारित लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 को राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद इसके सख्त प्रावधान लागू होने का रास्ता साफ हो गया है। नए कानून के तहत पेपर लीक कराने, प्रश्नपत्र खरीदने-बेचने, परीक्षा में संगठित धांधली करने और नकल माफियाओं के नेटवर्क से जुड़े दोषियों को अधिकतम 10 वर्ष तक की कठोर कैद और ₹50 लाख तक जुर्माने का सामना करना पड़ेगा।
सरकार का कहना है कि यह कानून लाखों युवाओं के भविष्य की सुरक्षा, भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता और नकल माफियाओं के नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करने की दिशा में ऐतिहासिक कदम है। हाल के वर्षों में विभिन्न राज्यों में हुई पेपर लीक की घटनाओं ने लाखों अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित किया था, जिसके बाद सख्त कानून की मांग लगातार उठ रही थी। पेपर लीक और संगठित नकल के मामलों में 10 वर्ष तक की जेल का प्रावधान।दोषियों पर 50 लाख तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा।परीक्षा कराने वाली एजेंसियों से मिलीभगत करने वाले संगठनों और सेवा प्रदाताओं पर भी कठोर कार्रवाई होगी।संगठित अपराध के मामलों में आर्थिक दंड और अन्य कानूनी कार्रवाई का भी प्रावधान है,जांच को तेज करने और दोषियों को शीघ्र सजा दिलाने के लिए विशेष व्यवस्था की जाएगी।
केंद्र सरकार का दावा है कि अब भर्ती परीक्षाओं में धांधली करने वाले गिरोहों के लिए बच निकलना आसान नहीं होगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई जाएगी और दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
देशभर के लाखों अभ्यर्थियों के लिए यह कानून राहत की खबर माना जा रहा है। लंबे समय से प्रतियोगी परीक्षाओं की निष्पक्षता पर उठ रहे सवालों के बीच सरकार का यह कदम भर्ती प्रक्रिया में विश्वास बहाल करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


