वॉशिंगटन/अम्मान। जॉर्डन स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे पर हुए मिसाइल हमले के बाद पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि यदि अमेरिकी हितों और सैनिकों पर दोबारा हमला हुआ तो अमेरिका ईरान को “बुरी तरह पीटेगा”। ट्रंप के इस बयान के बाद पूरे क्षेत्र में सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रखा गया है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हालात पर नजर रखी जा रही है।
जानकारी के अनुसार, जॉर्डन में स्थित अमेरिकी सैन्य बेस और सेंट्रल कमांड से जुड़े ठिकानों को बैलिस्टिक मिसाइलों से निशाना बनाया गया। अमेरिकी सेना का दावा है कि उसकी एयर डिफेंस प्रणाली ने अधिकांश मिसाइलों को लक्ष्य तक पहुंचने से पहले ही हवा में नष्ट कर दिया। अधिकारियों के अनुसार हमले के समय सैनिकों के पास प्रतिक्रिया देने के लिए केवल कुछ मिनट का समय था, लेकिन त्वरित कार्रवाई से बड़ा नुकसान टाल दिया गया।
इस बीच ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने इन हमलों की जिम्मेदारी लेते हुए कहा कि यह कार्रवाई अमेरिकी सैन्य गतिविधियों और क्षेत्र में बढ़ते हस्तक्षेप के जवाब में की गई है। ईरानी पक्ष ने चेतावनी दी कि यदि अमेरिका अपनी नीति नहीं बदलता तो आगे भी जवाबी कार्रवाई जारी रहेगी।
हमले के बाद अमेरिका ने सऊदी अरब की सैन्य सहायता के साथ इराक में ईरान समर्थित मिलिशिया के कई ठिकानों पर सटीक हवाई हमले किए। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक पिछले 72 घंटे के दौरान ड्रोन और मिसाइल हमलों में शामिल लॉजिस्टिक केंद्रों, हथियार भंडारों और ऑपरेशनल ठिकानों को निशाना बनाया गया। अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि इन कार्रवाईयों से ईरान समर्थित नेटवर्क को बड़ा नुकसान पहुंचा है।
राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि अमेरिका अपने सैनिकों और सहयोगी देशों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेगा। उन्होंने ईरान समर्थित मिलिशिया को वैश्विक शांति के लिए खतरा बताते हुए स्पष्ट किया कि भविष्य में भी किसी भी हमले का जवाब पूरी ताकत से दिया जाएगा।


