नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र के दौरान समाजवादी पार्टी ने शिक्षा, पेपर लीक, युवाओं के अधिकार, आरक्षण और अयोध्या के राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी के मुद्दे पर केंद्र सरकार के खिलाफ तीखा विरोध प्रदर्शन किया। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने पार्टी सांसदों के साथ संसद परिसर में प्रदर्शन कर सरकार पर कई गंभीर आरोप लगाए।
अखिलेश यादव ने कहा कि “उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक प्राथमिक विद्यालय बंद हुए हैं और मुख्यमंत्री के गृह क्षेत्र गोरखपुर में ही 500 प्राथमिक विद्यालय बंद किए गए। सरकार के एजेंडे में आरक्षण भी नहीं है।” उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में सबसे अधिक पेपर लीक की घटनाएं हुईं, जिससे लाखों युवाओं का भविष्य प्रभावित हुआ। उन्होंने कहा कि “सबसे ज्यादा पेपर लीक भारतीय जनता पार्टी की सरकार में हुए हैं। यही वजह थी कि इतनी बड़ी संख्या में युवा दिल्ली में इकट्ठा हुए थे।”
लोकसभा सांसद डिम्पल यादव ने भी सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि जो लोग गांधी जी के सत्य और अहिंसा के मार्ग पर संघर्ष कर रहे थे, उनके साथ अमानवीय व्यवहार किया गया। उन्होंने कहा कि युवाओं और छात्रों के आंदोलन को दबाने का प्रयास किया गया, लेकिन युवाओं ने अपने अधिकारों की लड़ाई जारी रखी।
डिम्पल यादव ने कहा कि “हो सकता है हमारे बच्चे आंदोलन में न बैठे हों, लेकिन वे देश के बच्चे थे और उसी भावना से हम उनके साथ खड़े हुए।” उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार बेटियों की सुरक्षा की बात करती है, लेकिन आंदोलन के दौरान महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार हुआ और बल प्रयोग किया गया। साथ ही उन्होंने कुछ सांसदों की भाषा पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि छात्रों को अराजक तत्व बताना दुर्भाग्यपूर्ण है।
उन्होंने युवाओं की सराहना करते हुए कहा कि “हमें गर्व है कि हमारे बच्चे लड़े और इस लड़ाई को जीता।” अंग्रेज़ी में दिए अपने संदेश में उन्होंने कहा कि सरकार ने युवाओं के सम्मान, अधिकार और गरिमा को चोट पहुंचाई है, लेकिन देश के युवाओं ने अपने अधिकारों की लड़ाई नहीं छोड़ी।
इसी क्रम में मंगलवार को समाजवादी पार्टी के सांसदों ने अयोध्या के राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी के मुद्दे को लेकर भी संसद परिसर में विरोध प्रदर्शन किया। पार्टी ने इस मामले की निष्पक्ष जांच और जवाबदेही तय करने की मांग की।
संसद के मानसून सत्र में इन मुद्दों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी राजनीतिक नोकझोंक जारी है। सरकार की ओर से इन आरोपों पर अलग-अलग अवसरों पर जवाब दिए गए हैं, जबकि विपक्ष शिक्षा व्यवस्था, युवाओं के भविष्य और जनहित के अन्य मुद्दों को लेकर सरकार को लगातार घेर रहा है।


