लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश प्राविधिक शिक्षा परिषद (बीटीईयूपी) ने मई-जून 2026 में आयोजित पॉलिटेक्निक सेमेस्टर, वार्षिक एवं विशेष बैक पेपर परीक्षाओं का परिणाम समय पर घोषित कर दिया है। परिषद ने दावा किया कि परीक्षाएं पूरी तरह नकलविहीन और पारदर्शी ढंग से संपन्न कराई गईं तथा उत्तर पुस्तिकाओं का डिजिटल मूल्यांकन कर रिकॉर्ड समय में परिणाम जारी किया गया।
इस वर्ष 4 मई से 5 जून 2026 के बीच प्रदेश के 236 परीक्षा केंद्रों पर परीक्षाएं आयोजित की गईं। इनमें कुल 2,68,686 छात्र-छात्राएं पंजीकृत थे। इनमें 1,24,671 सेमेस्टर प्रणाली, 1,27,304 वार्षिक प्रणाली तथा 7,784 विशेष बैक पेपर परीक्षार्थी शामिल रहे। उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन 157 राजकीय एवं अनुदानित पॉलिटेक्निक संस्थानों में डिजिटल माध्यम से कराया गया।
प्राविधिक शिक्षा परिषद के अध्यक्ष एवं प्रमुख सचिव डॉ. एम.के. शन्मुगा सुंदरम ने बताया कि अंतिम सेमेस्टर डिप्लोमा इंजीनियरिंग का उत्तीर्ण प्रतिशत 93.42 प्रतिशत, जबकि फार्मेसी का 62.69 प्रतिशत रहा। विद्यार्थी अपना परिणाम परिषद की आधिकारिक वेबसाइट www.bteup.ac.in पर देख सकते हैं।
इंजीनियरिंग स्ट्रीम में महामाया पॉलिटेक्निक ऑफ आईटी, महाराजगंज के आशुतोष प्रजापति ने 86.18 प्रतिशत अंक प्राप्त कर प्रदेश में प्रथम स्थान हासिल किया। राजकीय महिला पॉलिटेक्निक, वाराणसी की पूजा सिंह 85.62 प्रतिशत अंकों के साथ दूसरे और राजकीय महिला पॉलिटेक्निक, अमेठी की अनुष्का सिंह 85.38 प्रतिशत अंकों के साथ तीसरे स्थान पर रहीं।
फार्मेसी स्ट्रीम में रामेश्वरम फार्मेसी कॉलेज, सीतापुर की दिव्यांशी शुक्ला ने 84.35 प्रतिशत अंक प्राप्त कर पहला स्थान हासिल किया। टीआरसी महाविद्यालय, बाराबंकी की जूली देवी 82.87 प्रतिशत के साथ दूसरे तथा राजकीय पॉलिटेक्निक, जौनपुर के अभिषेक यादव 82.61 प्रतिशत अंकों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
इस बार के परिणामों में छात्राओं का शानदार प्रदर्शन देखने को मिला। इंजीनियरिंग और फार्मेसी दोनों स्ट्रीम के टॉप-10 में 8-8 स्थान छात्राओं ने अपने नाम किए। इसके अलावा पहली बार राजकीय पॉलिटेक्निक, जौनपुर और राजकीय महिला पॉलिटेक्निक, प्रयागराज ने फार्मेसी की टॉप-10 सूची में जगह बनाकर नया कीर्तिमान स्थापित किया।
परीक्षा की शुचिता बनाए रखने के लिए परिषद ने कड़ी कार्रवाई भी की। नियमों के उल्लंघन के मामलों में 194 छात्रों का परिणाम रोक दिया गया, जबकि उत्तर पुस्तिकाओं पर मोबाइल नंबर लिखने वाले 896 परीक्षार्थियों को संबंधित विषय में शून्य अंक दिए गए। परिषद का कहना है कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और अनुशासन बनाए रखने के लिए भविष्य में भी इसी तरह की सख्ती जारी रहेगी।


