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Sunday, July 26, 2026

जेन-जी की अभूतपूर्व सफलता अब बदल सकती व्यवस्था

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जेन-जी सावधान! तुम्हारी ताकत साबित हो चुकी… अब तुम्हें जाति और धर्म के नाम पर लड़ाने की साजिशों से बचने की जरूरत

जंतर मंतर पर एक नमूने ने हिला दिया देश, नतमस्तक कर दी सत्ता, यही ताकत बन सकती है देश का हथियार

सोनम बांगचुक के सफल निर्देशन में दिल्ली के जंतर मंतर के युवाओं की अभूतपूर्व मौजूदगी ने साफ कर दिया कि जाति और धर्म को पीछे छोड़ एकजुटता से भारत की १९९७ से २०१२ के बीच जन्मी जनरेशन-जेड अब केवल सोशल मीडिया पर सक्रिय नही है, बल्कि सडक़ों पर उतरकर अपनी आबाज बुलंद करने का भी माद््दा रखती है। यह वही पीढ़ी है जो डिजिटल दुनिया में पल बढ़ रही है लेकिन जरूरत पडने पर लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात मनवाने की क्षमता भी रखती है। मोदी सरकार को अपनी गिरफ्त में लेने के बाद यह सफलता और अखंडता जाति और धर्म के नाम पर खंडित न हो पाये इसका ध्यान रखना जरूरी है।
भारत में आज करीब ३७ करोड़ युवा जेन-जी वर्ग में आते हैं यानि देश की आबादी का लगभग २५ प्रतिशत हिस्सा। ध्यान रखने और संभलकर चलने की भी बात है। अगले एक दशक में यही वर्ग सबसे बड़ा मतदाता और सबसे बड़ा कार्यबल होते हुए प्रभावशाली सामाजिक समूह बनने जा रहा है। ऐसे में यदि यह पीढ़ी किसी मुद््दे पर एकजुट होती है तो उसकी आबाज को नजरअंदाज करना किसी भी सरकार या संस्था अथवा ताकत के लिए आसान नही होगा।
जंतर मंतर के आंदोलन ने यह साबित कर दिया कि नई पीढ़ी के युवाओं में ऊर्जा है, संगठन की क्षमता है और बदलाव करने की भी इच्छा और दम है। लेकिन सवाल यह है कि क्या यह ऊर्जा केवल एक मंत्री के त्यागपत्र की मांग तक सीमित रहेगी या फिर देश की उन समस्याओं की ओर भी बढ़ेगी जिनका असर प्रत्येक नागरिक पर पड़ रहा है। सवाल है कि क्या यह पीढ़ी देश में गहरे हो चले भ्रष्टाचार भ्रष्ट राजनैतिक और नौकरशाही तंत्र पर भी आवाज उठायेगी, क्या यह पीढ़ी ज्यूडिशियरी की थकी व्यवस्था पर भी आबाज बुलंद करेंगी?
आज भी आम आदमी का सबसे बड़ा संघर्ष भ्रष्टाचार लाल फीताशाही अनावश्यक देरी और जबाबदेही की कमी एवं गुण्डाराज से है। सरकारी सेवाओं से लेकर कई प्रशासनिक व कानूनी प्रक्रियाओं पर पारदर्शिता और समयवद्धता की मांग लगातार उठती रही है। यही कारण है कि शासन और न्याय व्यवस्था में सुधार की चर्चा समय-समय पर होती रही है लेकिन निर्णय आज तक शून्य ही रहा।
भारत दुनिया का सबसे युवा देश है जहां ६५ फीसदी आबादी ३५ वर्ष से कम आयु की है। यह केवल जनसंख्या का आंकड़ा नही बल्कि परिवर्तन की सबसे बडी ताकत है। इतिहास गवाह है कि जब-जब युवाओं ने शिक्षा पारदर्शी, सुशासन और जनहित के मुद््दों पर लोकतांत्रित तरीके से आबाज उठाई है तब तक नीतियों में बदलाव देखने को मिला है।
युवाओं की ताकत केवल सरकारें बदलने में नहीं, बल्कि व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी जबाबदेह और नागरिक केंद्रित बनाने में भी है। आंदोलन की सफलता केवल भीड़ से नही आंकी जाती बल्कि उससे पैदा होने वाले स्थाई सुधारों से तय होती है।
जेन-जी ने अपनी ताकत दिखा दी है। अब चुनौती यह है कि यह ताकत केवल विरोध तक सीमित न रहे, बल्कि संविधान, लोकतंत्र और कानून के दायरे में रहकर ऐसे भारत के निर्माण में लगे, जहां ईमानदार व्यवस्था, पारदर्शी प्रशासन, जातिवाद रहित समाज, समय पर न्याय और जबावदेह राजनीति केवल नारे नही, बल्कि हर नागरिक का अधिकार बनें।

बच्चों, ताकत दिख चुकी अब मोबाइल से बाहर निकल रणनीति बनाने का समय
दिल्ली के जंतर मंतर में पूरे मनोयोग के साथ भारत के भविष्य ने यह साबित कर दिया कि वह केवल मोबाइल पर रील्स नही देखना जानते बल्कि व्यवस्था को बदलने की ताकत भी रखते हैं। आज जेन-जी को समझदार मानने के लिए किसी सार्टिफिकेट की जरूरत नही बची, देश के प्रधानमंत्री खुद रील बनाने को मजबूर हो गये। देश के शिक्षा मंत्री को इस्तीफा देना पड़ गया, देश की व्यवस्था चलाने वाले मंत्री जेन जी के संग बैठकें करते दिख चुके अब साबित हुई ताकत को देश की व्यवस्था बदलने में लगाने का समय आ चुका, केवल बंदे मातरम नही भारत भूमि का वंदन करने की जरूरत है।

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