– जो हर पीढ़ी को राष्ट्रधर्म का पाठ पढ़ाती है
“जब तक सूरज-चाँद रहेगा, कारगिल के वीरों का नाम रहेगा।” यह केवल एक नारा नहीं, बल्कि उन अमर सैनिकों के प्रति पूरे राष्ट्र की श्रद्धा है, जिन्होंने 1999 में दुर्गम पहाड़ों पर अपने प्राणों की आहुति देकर तिरंगे की आन, बान और शान की रक्षा की।
हर वर्ष 26 जुलाई केवल एक स्मृति दिवस नहीं होता, बल्कि यह आत्ममंथन का अवसर भी होता है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि सीमाओं की सुरक्षा केवल हथियारों से नहीं, बल्कि उन सैनिकों के अदम्य साहस, अनुशासन और राष्ट्रभक्ति से होती है, जो विपरीत परिस्थितियों में भी “देश पहले” के संकल्प के साथ खड़े रहते हैं।
कारगिल युद्ध भारत के सैन्य इतिहास का ऐसा अध्याय है, जिसने पूरी दुनिया को भारतीय सेना की क्षमता और संकल्प का परिचय कराया। दुश्मन ने ऊंची चोटियों पर कब्जा कर सामरिक बढ़त हासिल करने की कोशिश की, लेकिन भारतीय सैनिकों ने असंभव प्रतीत होने वाले अभियान को संभव कर दिखाया। हजारों फीट ऊंची बर्फीली चोटियों पर लड़ाई लड़ना केवल सैन्य कौशल नहीं, बल्कि अदम्य इच्छाशक्ति का उदाहरण था।
इस युद्ध में भारत ने अपने अनेक वीर सपूत खोए। 527 से अधिक सैनिकों ने सर्वोच्च बलिदान दिया और 1,300 से अधिक जवान घायल हुए। हर शहीद अपने पीछे एक परिवार छोड़ गया, लेकिन पूरे देश को यह संदेश भी दे गया कि मातृभूमि की रक्षा से बड़ा कोई धर्म नहीं।
कारगिल विजय ने भारत की रक्षा नीति को भी नई दिशा दी। सीमा सुरक्षा, खुफिया तंत्र, आधुनिक हथियारों की खरीद, निगरानी प्रणाली और सैन्य तैयारियों में व्यापक सुधार किए गए। आज भारत रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से बढ़ रहा है। स्वदेशी मिसाइलें, अत्याधुनिक ड्रोन, आधुनिक तोपें, लड़ाकू विमान और सीमा पर तकनीकी निगरानी व्यवस्था इस बात का प्रमाण हैं कि देश ने कारगिल से मिले सबक को गंभीरता से अपनाया है।
लेकिन कारगिल विजय दिवस का महत्व केवल सैन्य उपलब्धियों तक सीमित नहीं है। यह दिन देश के नागरिकों, विशेषकर युवाओं को यह भी सिखाता है कि राष्ट्र निर्माण केवल सीमा पर नहीं, बल्कि अपने-अपने कार्यक्षेत्र में ईमानदारी, कर्तव्यनिष्ठा और जिम्मेदारी निभाने से भी होता है। सैनिक सीमा पर देश की रक्षा करते हैं, तो नागरिक लोकतंत्र, संविधान और सामाजिक सद्भाव की रक्षा करते हैं।
आज जब दुनिया अनेक भू-राजनीतिक चुनौतियों से गुजर रही है, तब राष्ट्रीय एकता पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। ऐसे समय में हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी विविधता में एकता और अपने सशस्त्र बलों पर अटूट विश्वास है। राजनीतिक मतभेद हो सकते हैं, लेकिन सेना के सम्मान और राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर पूरा देश एक स्वर में खड़ा दिखाई देना चाहिए।
कारगिल के शहीदों के परिवार आज भी अपने प्रियजनों के बलिदान पर गर्व करते हैं। यह हमारा दायित्व है कि उनके त्याग को केवल औपचारिक समारोहों तक सीमित न रखें, बल्कि उनके सपनों के भारत का निर्माण करें,एक ऐसा भारत जो सुरक्षित हो, आत्मनिर्भर हो, अनुशासित हो और अपने सैनिकों के सम्मान को सर्वोच्च स्थान देता हो।
कारगिल विजय दिवस हमें यह याद दिलाता है कि आजादी की कीमत केवल इतिहास की किताबों में नहीं लिखी होती, बल्कि वह उन सैनिकों के लहू से लिखी जाती है, जो अपने आज को हमारे कल के लिए न्योछावर कर देते हैं।
यही कारगिल की सबसे बड़ी सीख है,राष्ट्र सर्वोपरि था, है और रहेगा।


