नई दिल्ली। 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान हुई हिंसा के मामले में दिल्ली पुलिस ने कार्रवाई तेज करते हुए दर्ज मुकदमे में हत्या के प्रयास समेत भारतीय न्याय संहिता की कई गंभीर धाराएं जोड़ दी हैं। पुलिस के अनुसार कर्तव्य पथ थाने में तैनात एक निरीक्षक की शिकायत पर दर्ज मुकदमे में आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों ने भीड़ को बैरिकेड तोड़कर संसद की ओर बढ़ने के लिए उकसाया, जिसके बाद पुलिसकर्मियों पर पथराव और हमला हुआ।
पुलिस का दावा है कि प्रदर्शनकारियों को पहले ही धारा 163 लागू होने और प्रदर्शन की अनुमति नहीं होने की जानकारी दी गई थी, लेकिन चेतावनी के बावजूद भीड़ पीछे नहीं हटी। आरोप है कि पुलिसकर्मियों को घेरकर उनके साथ मारपीट की गई तथा उन पर पत्थर और अन्य वस्तुएं फेंकी गईं। पुलिस ने इसे जवानों की जान को खतरे में डालने वाला हमला बताते हुए हत्या के प्रयास की धारा भी जोड़ दी है।दिल्ली पुलिस ने बताया कि मामले में सरकारी कर्मचारियों पर हमला, ड्यूटी में बाधा, गैरकानूनी जमावड़ा, दंगा, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और मानव जीवन को खतरे में डालने सहित 13 धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। घटना में 129 पुलिसकर्मियों और 60 से अधिक प्रदर्शनकारियों के घायल होने का दावा किया गया है। अब तक इस प्रकरण में करीब 15 मुकदमे दर्ज किए जा चुके हैं।
उधर, जंतर-मंतर प्रदर्शन को लेकर सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रही भ्रामक सूचनाओं पर अपना पक्ष रखने के लिए दिल्ली पुलिस शनिवार को प्रेस वार्ता करेगी, जिसमें मामले की जांच और पुलिस कार्रवाई से जुड़ी जानकारी साझा की जाएगी।


