लखनऊ: “ग्रीन मेट्रो, क्लीन मेट्रो” के विजन को साकार करते हुए उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (UPMRC) जल संरक्षण को बढ़ावा दे रहा है। मेट्रो परियोजनाओं (Metro projects) की योजना, निर्माण और संचालन में अपनाए गए वर्षा जल संचयन, अपशिष्ट जल पुनर्चक्रण और जल प्रबंधन उपायों के जरिए ताजे जल की खपत कम की जा रही है तथा जल संसाधनों के जिम्मेदार उपयोग को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
• UPMRC ने लखनऊ, कानपुर और आगरा मेट्रो नेटवर्क में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाए हैं, जिनसे प्रतिवर्ष लगभग 62 लाख लीटर जल संरक्षण होता है। यह प्रणाली भूजल पुनर्भरण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
• मेट्रो डिपो में स्थापित सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) के माध्यम से अपशिष्ट जल का उपचार कर उसे ट्रेन धुलाई, डिपो रखरखाव और बागवानी कार्यों में पुनः उपयोग किया जाता है। इससे ताजे जल पर निर्भरता कम होती है।
• मेट्रो स्टेशनों पर सेंसर आधारित यूरिनल फ्लशिंग सिस्टम लगाए गए हैं, जिससे यात्रियों की सुविधा बनाए रखते हुए जल उपयोग को अनुकूलित किया जा रहा है।
• लखनऊ, कानपुर और आगरा मेट्रो नेटवर्क में UPMRC ने 1.1 लाख वर्गमीटर से अधिक हरित परिदृश्य (ग्रीन लैंडस्केप) विकसित किया है। इन क्षेत्रों की सिंचाई उपचारित जल से की जाती है।
इस अवसर पर UPMRC के प्रबंध निदेशक श्री सुशील कुमार ने कहा, “जल संरक्षण सतत शहरी विकास का एक अहम हिस्सा है। वर्षा जल संचयन, अपशिष्ट जल पुनर्चक्रण और कुशल जल प्रबंधन प्रणालियों के जरिए UPMRC जल संरक्षण के लिए निरंतर प्रयास कर रहा है, साथ ही सुरक्षित, विश्वसनीय और पर्यावरण-अनुकूल सार्वजनिक परिवहन भी उपलब्ध करा रहा है।”
UPMRC देश का पहला मेट्रो रेल संगठन है, जिसे लखनऊ, कानपुर और आगरा के सभी 48 परिचालन मेट्रो स्टेशनों के लिए IGBC प्लैटिनम ग्रीन बिल्डिंग प्रमाणन प्राप्त हुआ है।
मेट्रो संचालन शुरू होने के बाद से UPMRC ने 20 करोड़ से अधिक यात्री यात्राओं को सुगम बनाया है, जिससे लगभग 8 करोड़ लीटर ईंधन की बचत और 2 लाख टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आई है। यह स्वच्छ एवं सतत शहरी परिवहन को बढ़ावा देने की दिशा में अहम योगदान है।


