प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भ्रष्टाचार के मुद्दे पर सुनवाई के दौरान कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि समाज में भ्रष्टाचार के प्रति बढ़ती संवेदनहीनता बेहद चिंताजनक है। हमीरपुर से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन ने कहा कि यदि धार्मिक आस्था के सर्वोच्च प्रतीकों से जुड़े मामलों पर भी समाज विचलित नहीं होता, तो यह गंभीर चिंता का विषय है।
सुनवाई के दौरान न्यायालय ने ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल की 2025 की रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए कहा कि भ्रष्टाचार की धारणा के मामले में भारत 182 देशों में 91वें स्थान पर है। अदालत ने टिप्पणी की कि दशकों से भ्रष्टाचार को सामान्य मान लेने की प्रवृत्ति समाज में गहराई तक पैठ बना चुकी है, जिससे जवाबदेही और नैतिक मूल्यों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।
न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन ने हाल ही में सामने आए राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि ऐसे संवेदनशील मामले भी लोगों के भीतर आत्ममंथन या शर्म की भावना उत्पन्न नहीं कर पाते, तो यह समाज में ईमानदारी के स्तर पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
हालांकि, अदालत की ये टिप्पणियां संबंधित मामले की सुनवाई के दौरान की गई मौखिक टिप्पणियां हैं। मामले की सुनवाई और कानूनी प्रक्रिया नियमानुसार जारी है।
राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी, भ्रष्टाचार पर जताई गहरी चिंता


