कमालगंज: थाना कमालगंज के नगला दाऊद गांव में ढाई साल पहले हुए खूनी भूमि विवाद का अदालत ने पटाक्षेप कर दिया। अपर सत्र न्यायाधीश अभिनीताम उपाध्याय की अदालत ने इस मामले में दोनों पक्षों के 16 आरोपियों को दोषी करार दिया है और सभी की जमानत तत्काल प्रभाव से निरस्त कर जिला जेल भेजने का आदेश दिया। सजा के बिंदु पर सुनवाई 15 जुलाई को होगी।
क्या था मामला: 10 जनवरी 2024 को गांव में पैतृक जमीन पर कब्जे को लेकर दो पक्ष आमने-सामने आ गए। विवाद इतना बढ़ा कि दोनों ओर से लाठी-डंडे, धारदार हथियार और अवैध तमंचों का इस्तेमाल हुआ। खूनी संघर्ष में कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।
घटना के बाद दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के खिलाफ मुकदमे दर्ज कराए। एक पक्ष की रुकसाना ने घर में घुसकर मारपीट, फायरिंग और तोड़फोड़ का आरोप लगाया, जबकि दूसरे पक्ष ने जानलेवा हमले का केस दर्ज कराया।
मौत बनी हत्या का केस: इस हिंसा में गंभीर रूप से घायल तौहीद खां को इलाज के लिए दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल भेजा गया था, जहां 15 जनवरी 2024 को उनकी मौत हो गई। इसके बाद पुलिस ने केस में गैर-इरादतन हत्या की धाराएं भी जोड़ दीं।
किसे-किसे माना दोषी: अदालत ने गैर-इरादतन हत्या सहित अन्य आरोपों में आसिफ उर्फ मुन्ना, वसीम खां, सद्दाब खां, बाबर खां, अरशद उर्फ अक्कू, आमिर खां, तशरीफ शानू और अब्दुल मन्नान ईशान को दोषी ठहराया।
वहीं जवाबी मुकदमे में जानलेवा हमला सहित अन्य आरोपों में इदरीस, तमजीद, तमहीद, जुनैद, नाजिम, आजम, तौफीक और मगरूल को दोषी सिद्ध किया गया।
कोर्ट ने सभी 16 दोषियों के निजी मुचलके और जमानतें रद्द कर उन्हें हिरासत में ले लिया। अब 15 जुलाई को सजा का ऐलान किया जाएगा।


