फर्रुखाबाद। शहर के मुहल्ला मादार वाड़ी स्थित इमबाड़े में हुई मजलिस खिताब करते हुए
मौलाना सदाकत हुसैन सैथली ने कहा कि इमाम हुसैन की शहादत का जिक्र कयामत किया जाता रहेगा और लोग उससे प्रेरणा लेते रहेंगे।
उन्होंने कहा कि मुहर्रम के महीने में मौला इमाम हुसैन को कर्बला में धोखे से यजीद ने बुलाकर मौला इमाम हुसैन के खानदान का पानी बंद कर दिया वहीं जंग का ऐलान भी कर दिया गया। मौला इमाम हुसैन के लखते जिगर 6 महीने के अली असगर को भी यजीदी फौज में तीर मार कर शहीद कर दिया। जबकि मौला इमाम हुसैन ने अपने नन्हें 6 महीने के अली असगर के लिए पानी मांगा लेकिन यजीद की फौजी ने नन्हे अली असगर पर तीर चला कर अली असगर को शहीद कर दिया ।मौला इमाम हुसैन चाहते तो नहरे फरहाद चलकर खुद मौला इमाम हुसैन के पास आ जाती लेकिन मौला इमाम हुसैन ने अपने नाना अल्लाह के महबूब नबी ए रसूल से जो वादा बचपन में किया था कर्बला के मैदान में उसे पूरा किया। इमाम हुसैन ने अपने नाना की उम्मत को यह बता दिया कि सच्चाई का रास्ता कितना भी कठिन हो लेकिन उसे रास्ते को छोड़ना नहीं चाहिए । उन्होंने ने कहा कि पहले नमाज फिर सजदा के दौरान सजदे में अपने सर को कलम करा के हम कब तक इस्लाम पहुंचा है ।अगर मौला इमाम हुसैन की शहादत कर्बला के मैदान में नहीं होती तो आज हम तक अल्लाह का इस्लाम नहीं पहुंचता ।पूरी दुनिया में मौला इमाम हुसैन ने जिस तरह से इस्लाम का परचम लहराकर इस्लाम को अपने नाना की उम्मत तक पहुंचाया है यह हम सभी पर मौला इमाम हुसैन का एहसान है ।मौला इमाम हुसैन के साहबजादे हजरत ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती अजमेरी ख्वाजा गरीब नवाज ने हम तक इस्लाम को पहुंचाया है।मौला इमाम हुसैन की शहादत का जिक्र कयामत तक जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि मुहर्रम के महीने में मौला इमाम हुसैन के सदके में अल्लाह हमारी सारी परेशानियों को दूर कर दे यह हम सब की अल्लाह
ताला से मौला इमाम हुसैन के सदके मे दुआ है । अल्लाह से हाथ उठा कर दुआ मांगी गईं आदि सैकड़ो लोग उपस्थित रहे।
कयामत तक होता रहेगा इमाम हुसैन की कुर्बानी का जिक्र: मौलाना सदाकत


