मेरठ
अनुसूचित जाति की बीए छात्रा के अपहरण और हत्या के मामले को लेकर बुधवार को कलेक्ट्रेट के बाहर बड़ा विरोध प्रदर्शन हुआ। पीड़ित परिवार, समर्थकों और विभिन्न संगठनों के लोगों ने सड़क पर धरना देकर जाम लगा दिया। पुलिस अधिकारियों की समझाइश के बावजूद प्रदर्शनकारी नहीं हटे, जिसके बाद मौके पर पहुंचे एसएसपी अविनाश पांडेय पर कुछ प्रदर्शनकारियों को थप्पड़ मारने के आरोप लगे। इसके बाद स्थिति और तनावपूर्ण हो गई तथा पुलिस ने लाठीचार्ज कर सड़क खाली कराई और कई लोगों को हिरासत में लिया।
यह मामला उस छात्रा से जुड़ा है जो 15 मई को स्नातक की परीक्षा देने घर से निकली थी लेकिन कॉलेज नहीं पहुंची। पुलिस के अनुसार, मुख्य आरोपी अंकुश ने छात्रा का अपहरण कर उसे एक खेत में ले जाकर शादी का दबाव बनाया। कथित तौर पर छात्रा के इनकार करने पर उसकी गला दबाकर हत्या कर दी गई। पुलिस ने आरोपी अंकुश समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया है, जबकि पीड़ित परिवार का आरोप है कि मामले में सामूहिक दुष्कर्म हुआ और अन्य आरोपियों की भी गिरफ्तारी की जानी चाहिए।
प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने आरोपियों के घरों पर बुलडोजर चलाने, पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता, सुरक्षा और मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक अदालत में कराने की मांग की। पुलिस का कहना है कि कुछ लोगों ने परिवार को उकसाकर सड़क जाम कराया। वहीं हिरासत में लिए गए रवि गौतम ने आरोप लगाया कि बंदी वाहन के अंदर भी उनके साथ मारपीट की गई। घटना के बाद उन्होंने अपने गमछे से फंदा लगाने की कोशिश की, जिसके संबंध में भी मामला दर्ज किया गया है।
एसएसपी अविनाश पांडेय ने कहा कि पुलिस ने पहले प्रदर्शनकारियों को शांतिपूर्वक समझाने का प्रयास किया था, लेकिन चेतावनी के बाद भी सड़क जाम समाप्त नहीं किया गया, जिसके कारण कार्रवाई करनी पड़ी। उन्होंने यह भी दावा किया कि छात्रा के परिजन पहले पुलिस की कार्रवाई से संतुष्ट थे और कुछ बाहरी लोगों ने उन्हें प्रदर्शन के लिए उकसाया। इस बीच विपक्षी नेताओं ने भी पुलिस कार्रवाई और दलित प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज की आलोचना की है। मामले की जांच जारी है और प्रशासन ने कानून व्यवस्था बनाए रखने की बात कही है।


