09 जुलाई 1920 को हुई थी संगठन की स्थापना, 1955 में बना स्टेट बैंक ऑफ इंडिया स्टाफ एसोसिएशन
नई दिल्ली/लखनऊ। बैंक कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा और शोषण, अन्याय तथा अत्याचार के विरुद्ध संघर्ष के उद्देश्य से 09 जुलाई 1920 को स्थापित इम्पीरियल बैंक ऑफ इंडिया स्टाफ एसोसिएशन ने गुरुवार को अपनी ऐतिहासिक यात्रा का एक और महत्वपूर्ण पड़ाव पूरा किया। स्थापना दिवस के अवसर पर देशभर में संगठन से जुड़े पदाधिकारियों और कर्मचारियों ने संस्थापक नेताओं एवं पूर्वजों को श्रद्धापूर्वक नमन किया।
संगठन के इतिहास के अनुसार, 01 जुलाई 1955 को इम्पीरियल बैंक ऑफ इंडिया का नाम बदलकर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया किए जाने के बाद संगठन का नाम स्टेट बैंक ऑफ इंडिया स्टाफ एसोसिएशन (SBISA) रखा गया। तब से यह संगठन बैंक कर्मचारियों के हितों की रक्षा और उनके अधिकारों के लिए निरंतर संघर्षरत है।
इस अवसर पर संगठन के वरिष्ठ सदस्यों ने कहा कि मोहन लाल मजूमदार, एम.आर. अवस्थी, निर्मल चौधरी, पी. लक्ष्मी नरशैया, शंकरदत्ता, सुरेश मेहरा, के.के. बंदलिश, जे.एन. कपूर, सोमेंद्र नाथ टैगोर, ज्योति घोष, सी.एल. राजा रत्नम, आर.ओ. शाह, वाई. तारक नाथ, पी.के. पटनायक, वी.के. गुप्ता, टी.एस. रामानुजम, सी. कट्टो और नरेंद्र कुमार पालीवाल जैसे समर्पित नेताओं के संघर्ष और नेतृत्व ने संगठन को मजबूत आधार प्रदान किया।
वक्ताओं ने कहा कि नई पीढ़ी के युवा कर्मचारी भी संगठन की गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए पूरी ऊर्जा और समर्पण के साथ कार्य कर रहे हैं। संगठन का उद्देश्य केवल कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा करना ही नहीं, बल्कि बैंकिंग व्यवस्था में न्याय, सम्मान और पारदर्शिता को भी मजबूत करना है।
स्थापना दिवस पर आयोजित कार्यक्रमों में संगठन की एकता, संघर्ष और सेवा भावना को आगे बढ़ाने का संकल्प दोहराया गया। कर्मचारियों ने ईश्वर से प्रार्थना की कि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया स्टाफ एसोसिएशन भविष्य में भी हिमालय की तरह अडिग रहकर अन्याय और शोषण के विरुद्ध कर्मचारियों की आवाज़ बना रहे।
इस अवसर पर संगठन के सदस्यों ने SBISA, AISBISF और NCBE के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए संगठन की एकजुटता और नेतृत्व के प्रति विश्वास व्यक्त किया।


