वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए अंतरिम युद्धविराम समझौते को समाप्त घोषित कर दिया। उन्होंने कहा कि ईरान के साथ बातचीत करना “समय की बर्बादी” है और मौजूदा ईरानी सरकार को “कैंसर” बताते हुए कहा कि इसे जड़ से खत्म करना होगा। ट्रंप के इस बयान के बाद मध्य-पूर्व में एक बार फिर तनाव बढ़ने की आशंका गहरा गई है।
तुर्की की राजधानी अंकारा में नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि उनके अनुसार ईरान के साथ हुआ अंतरिम समझौता अब समाप्त हो चुका है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वह अब ईरान के साथ किसी भी तरह का लेन-देन नहीं करना चाहते। ट्रंप ने ईरानी नेतृत्व पर निशाना साधते हुए कहा कि उनकी मानसिकता खतरनाक है और उनके साथ किसी समझौते का कोई लाभ नहीं है।
दरअसल, पाकिस्तान की मध्यस्थता में अमेरिका और ईरान के बीच 60 दिनों के अंतरिम युद्धविराम पर सहमति बनी थी, ताकि स्थायी समझौते की दिशा में बातचीत आगे बढ़ सके। हालांकि कतर में हाल ही में हुई अप्रत्यक्ष वार्ता बिना किसी नतीजे के समाप्त हो गई। इसके बाद अमेरिकी सेना ने ईरान के ठिकानों पर नए हमले किए, जिससे दोनों देशों के रिश्ते और तनावपूर्ण हो गए।
इसी बीच अमेरिका ने ईरान को कच्चा तेल और पेट्रोलियम उत्पाद बेचने की दी गई अस्थायी छूट भी वापस ले ली है। अमेरिकी प्रशासन ने पहले 21 अगस्त तक तेल निर्यात की अनुमति दी थी, लेकिन होर्मुज जलडमरूमध्य में तीन तेल टैंकरों पर हमलों के बाद यह लाइसेंस रद्द कर दिया गया। अमेरिका ने ईरान से जुड़े सभी व्यावसायिक लेन-देन को समाप्त करने के लिए 17 जुलाई तक की समय-सीमा तय की है।
ट्रंप के ताजा बयान और अमेरिकी फैसलों ने पश्चिम एशिया में एक बार फिर भू-राजनीतिक तनाव बढ़ा दिया है। अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच टकराव और बढ़ता है तो इसका असर वैश्विक तेल बाजार, समुद्री व्यापार और क्षेत्रीय सुरक्षा पर भी पड़ सकता है।


