फर्रुखाबाद। बेसिक शिक्षा विभाग में सामुदायिक (डीसी) और समेकित शिक्षा (डीसी) के लंबे समय से रिक्त चल रहे पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया एक बार फिर चर्चाओं में है। मंगलवार को मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) कार्यालय में गठित चयन समिति ने दोनों पदों के लिए अभ्यर्थियों का साक्षात्कार लिया, लेकिन इंटरव्यू खत्म होते ही चयन प्रक्रिया को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। बुधवार को भी पूरे शिक्षा विभाग और अभ्यर्थियों के बीच सिफारिश, सांठगांठ और दबाव की चर्चाएं गर्म रहीं।
जानकारी के अनुसार, सामुदायिक डीसी पद के लिए 37 तथा समेकित शिक्षा डीसी पद के लिए 45 आवेदन प्राप्त हुए थे। प्रारंभिक जांच एवं अन्य औपचारिकताओं के बाद सामुदायिक पद के लिए 11 और समेकित शिक्षा पद के लिए 6 अभ्यर्थियों को साक्षात्कार के लिए बुलाया गया था। मंगलवार को सीडीओ कार्यालय में चयन समिति के समक्ष सभी अभ्यर्थियों का इंटरव्यू संपन्न हुआ।
चयन प्रक्रिया को लेकर पहले भी विवाद सामने आ चुका है। पूर्व में हुए साक्षात्कार के दौरान एक अभ्यर्थी वंदना कुशवाहा द्वारा चयन तय होने का दावा किए जाने की चर्चाएं रही थीं। इतना ही नहीं, सोशल मीडिया और विभिन्न ग्रुपों में उन्हें अग्रिम बधाइयां दिए जाने के संदेश भी वायरल हुए थे, जिससे चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठे थे।
मंगलवार के साक्षात्कार के बाद भी अभ्यर्थियों और उनके समर्थकों की गतिविधियां चर्चा का विषय बनी रहीं। सूत्रों के अनुसार, कई अभ्यर्थी अधिकारियों तक पहुंच बनाने, सिफारिश कराने और प्रभावशाली लोगों के माध्यम से दबाव बनवाने की कोशिशों में जुटे दिखाई दिए। कुछ लोगों के जनप्रतिनिधियों और नेताओं के यहां पहुंचकर अधिकारियों से फोन करवाने के प्रयास की भी चर्चाएं रहीं। वहीं, यह भी चर्चा है कि कुछ लोग धनबल के सहारे पद हासिल करने की जुगाड़ में लगे हुए हैं।
ऐसे में चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता बनाए रखने और सभी आशंकाओं को दूर करने के लिए अभ्यर्थियों एवं शिक्षा विभाग की निगाहें अब अंतिम चयन सूची पर टिकी हुई हैं। यदि चयन पूरी तरह निष्पक्ष और मेरिट के आधार पर होता है तो सभी तरह की अटकलों पर स्वतः विराम लग जाएगा।


