नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) ने इंडोनेशिया (Indonesian) की संसद को संबोधित करते हुए दोनों देशों की ऐतिहासिक मित्रता, रणनीतिक साझेदारी और साझा लोकतांत्रिक मूल्यों को नई मजबूती देने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि 140 करोड़ भारतीयों का प्रतिनिधित्व करते हुए इंडोनेशिया आना उनके लिए सौभाग्य की बात है और यहां के लोगों का स्नेह व गर्मजोशी भरा स्वागत वह कभी नहीं भूलेंगे।
पीएम मोदी ने राष्ट्रपति प्राबोवो के कॉपीराइट संबंधी उल्लेख का जिक्र करते हुए कहा कि प्यार, स्नेह, दोस्ती और आपसी सम्मान पर किसी का कॉपीराइट नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति प्राबोवो के साथ उनकी मित्रता सभी सीमाओं से परे है।
प्रधानमंत्री ने इंडोनेशिया का सर्वोच्च सम्मान मिलने पर आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वह इसे पूरे भारत और भारतीयों के प्रति इंडोनेशियाई जनता के स्नेह का सम्मान मानते हैं। उन्होंने कहा कि भारत विस्तारवाद नहीं, बल्कि विकास की नीति पर चलता है और ‘सबका साथ, सबका विकास’ के मंत्र के साथ आगे बढ़ रहा है।
पीएम मोदी ने कहा कि भले ही दोनों देशों की राजधानियां हजारों किलोमीटर दूर हों, लेकिन समुद्र भारत और इंडोनेशिया को जोड़ने वाला सेतु है। यह साझा भविष्य, व्यापार और समुद्री सहयोग का महत्वपूर्ण आधार है।
आतंकवाद पर प्रधानमंत्री ने कहा कि दोनों देश हमेशा एक-दूसरे के साथ मजबूती से खड़े रहे हैं। उन्होंने पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत के प्रति इंडोनेशिया के समर्थन के लिए धन्यवाद दिया और कहा कि ‘जॉइंट वर्किंग ग्रुप’ के जरिए दोनों देश आतंकवाद-रोधी सहयोग को और मजबूत कर रहे हैं।
पीएम मोदी ने कहा कि पिछले वर्ष इंडोनेशिया BRICS का पूर्ण सदस्य बना, जबकि इस वर्ष भारत इसकी अध्यक्षता कर रहा है। उन्होंने दोनों देशों से BRICS को अधिक व्यावहारिक, संतुलित और ग्लोबल साउथ की जरूरतों के प्रति संवेदनशील बनाने के लिए मिलकर काम करने का आह्वान किया।


