बरेली
29.920 किलोमीटर लंबी रिंग रोड परियोजना का निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत चार रेल ओवरब्रिज (आरओबी), तीन इंटरचेंज, 17 किलोमीटर लंबी सर्विस लेन, सात छोटे जंक्शन, आठ बस स्टॉप और 46 छोटे पुल बनाए जा रहे हैं। परियोजना का लगभग 17 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। हालांकि, मानसून के कारण अगले तीन महीनों तक निर्माण कार्य की गति अपेक्षाकृत धीमी रहने की संभावना है। रिंग रोड बनने के बाद शहर में भारी वाहनों का दबाव कम होगा और यातायात अधिक सुगम एवं सुरक्षित बनेगा।
परियोजना के अंतर्गत बरेली-मुरादाबाद हाईवे पर धंतिया के पास, बरेली-बदायूं हाईवे पर रामगंगा के निकट तथा बरेली-लखनऊ रेल लाइन पर तीन आरओबी का निर्माण कार्य शुरू हो चुका है। चौथा आरओबी भी परियोजना का हिस्सा है। वहीं चौबारी, झुमका तिराहा और रजऊ परसपुर गांव के पास तीन इंटरचेंज विकसित किए जा रहे हैं, जिनके माध्यम से बरेली-मथुरा, बरेली-मुरादाबाद, बरेली-सीतापुर और बरेली-पीलीभीत हाईवे को रिंग रोड से जोड़ा जाएगा। इसके साथ ही 17 किलोमीटर लंबी सर्विस लेन का निर्माण भी जारी है, जिससे विभिन्न मार्गों पर आने-जाने वाले वाहनों की आवाजाही और अधिक सुविधाजनक होगी।
बरेली-नैनीताल हाईवे को भी रिंग रोड से जोड़ने की योजना है, लेकिन इस हिस्से में रेलवे की अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) नहीं मिलने के कारण कार्य फिलहाल अटका हुआ है। इस संबंध में नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) और रेलवे के बीच लगातार वार्ता चल रही है। अधिकारियों का कहना है कि समाधान निकलने के बाद नैनीताल हाईवे को भी रिंग रोड से जोड़ दिया जाएगा, जिससे पूरे क्षेत्र का सड़क नेटवर्क और अधिक मजबूत होगा।
एनएचएआई के अधिकारियों के अनुसार रिंग रोड को इस प्रकार डिजाइन किया गया है कि इस पर वाहन 100 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार से सुरक्षित यात्रा कर सकेंगे। परियोजना में सात छोटे जंक्शन, आठ यात्री शेड और 46 छोटे पुल भी बनाए जा रहे हैं। बरेली डिवीजन के अधिशासी अभियंता अश्वनी चौहान ने बताया कि वर्तमान में आरओबी, इंटरचेंज, सर्विस लेन और छोटे पुलों के निर्माण पर प्राथमिकता के साथ कार्य किया जा रहा है। परियोजना पूरी होने के बाद शहर के भीतर भारी वाहनों का आवागमन काफी कम होगा, जिससे ट्रैफिक जाम में कमी आएगी और लोगों को तेज, सुरक्षित तथा सुगम यात्रा का लाभ मिलेगा।


