शरद कटियार
अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में अंतरिम महामंत्री के रूप में कृष्ण मोहन की नियुक्ति केवल प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि ऐसे समय में लिया गया महत्वपूर्ण निर्णय है जब ट्रस्ट की कार्यप्रणाली और वित्तीय पारदर्शिता को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। पूर्व महामंत्री चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे के बाद नई जिम्मेदारी ऐसे व्यक्ति को सौंपी गई है, जिनके पास प्रशासनिक अनुभव के साथ संगठनात्मक कार्य का भी लंबा अनुभव है।
राम मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र और देश की सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक है। ऐसे में ट्रस्ट के हर निर्णय, हर वित्तीय लेन-देन और हर प्रशासनिक प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता और जवाबदेही अनिवार्य है। कृष्ण मोहन ने पद संभालते ही दान, चढ़ावे और वित्तीय प्रबंधन को सार्वजनिक करने तथा किसी भी अनियमितता पर सख्त कार्रवाई का जो भरोसा दिलाया है, वह स्वागत योग्य है।
अब आवश्यकता केवल आश्वासन देने की नहीं, बल्कि उन्हें धरातल पर लागू करने की है। यदि ट्रस्ट नियमित रूप से वित्तीय विवरण सार्वजनिक करता है, निर्णय प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाता है और श्रद्धालुओं के विश्वास को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है, तो यह संस्था की विश्वसनीयता को और मजबूत करेगा।
आस्था तभी और मजबूत होती है जब उसके साथ पारदर्शिता और उत्तरदायित्व भी जुड़े हों। राम मंदिर ट्रस्ट के सामने यही सबसे बड़ी चुनौती और सबसे बड़ा अवसर है। नई टीम से उम्मीद है कि वह इन कसौटियों पर पूरी तरह खरी उतरेगी और देश-विदेश के करोड़ों रामभक्तों के विश्वास को और सुदृढ़ करेगी।


