फर्रुखाबाद। नगर के बढ़पुर क्षेत्र में अनोखे मिष्ठान भंडार के पीछे लगभग 26 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित रेलवे अंडरपास इन दिनों लोगों के लिए सुविधा के बजाय परेशानी का कारण बनता जा रहा है। अंडरपास में लगातार हो रहे जलभराव और दीवारों से पानी के रिसाव ने इसकी गुणवत्ता और सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार शिकायत किए जाने के बावजूद रेलवे प्रशासन और संबंधित विभागों की ओर से अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई है।
बारिश होने के बाद अंडरपास के भीतर बड़ी मात्रा में पानी भर जाता है, जिससे आवागमन बुरी तरह प्रभावित हो जाता है। जलभराव के कारण दोपहिया और चारपहिया वाहन चालकों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। कई बार पानी की गहराई का सही अनुमान न लग पाने से वाहन बीच रास्ते में बंद हो जाते हैं या फंस जाते हैं, जिससे दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। पैदल राहगीरों के लिए भी पानी से होकर गुजरना जोखिम भरा साबित हो रहा है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि करोड़ों रुपये की लागत से बनाए गए इस अंडरपास से वर्षों तक सुरक्षित और सुगम आवागमन की उम्मीद थी, लेकिन निर्माण के कुछ ही वर्षों बाद इसकी दीवारों से पानी का लगातार रिसाव शुरू हो गया। इससे निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते आवश्यक मरम्मत नहीं कराई गई तो भविष्य में यह समस्या और गंभीर रूप ले सकती है।
अंडरपास में जलभराव के कारण आसपास के क्षेत्र में भी यातायात प्रभावित होता है। बरसात के दिनों में वाहन चालकों को लंबा चक्कर लगाकर अपने गंतव्य तक पहुंचना पड़ता है, जिससे समय और ईंधन दोनों की बर्बादी होती है। वहीं रात के समय पर्याप्त रोशनी और जलभराव के कारण दुर्घटना का खतरा और अधिक बढ़ जाता है।
क्षेत्रवासियों का आरोप है कि उन्होंने कई बार रेलवे अधिकारियों और संबंधित विभागों को इस समस्या से अवगत कराया है, लेकिन अब तक केवल आश्वासन ही मिले हैं। स्थायी समाधान के लिए न तो जलनिकासी व्यवस्था में सुधार किया गया है और न ही दीवारों से हो रहे रिसाव को रोकने के लिए कोई ठोस कदम उठाया गया है। इससे लोगों में प्रशासन के प्रति नाराजगी बढ़ती जा रही है।
स्थानीय लोगों ने रेलवे प्रशासन और जिला प्रशासन से मांग की है कि अंडरपास का तकनीकी निरीक्षण कराकर निर्माण की गुणवत्ता की जांच कराई जाए। साथ ही जलनिकासी की स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, दीवारों के रिसाव को तत्काल रोका जाए तथा नियमित रखरखाव की व्यवस्था बनाई जाए, ताकि बरसात के दौरान लोगों को परेशानी का सामना न करना पड़े।
नागरिकों का कहना है कि सार्वजनिक परियोजनाओं पर खर्च होने वाला करोड़ों रुपये का धन तभी सार्थक माना जाएगा, जब आम जनता को सुरक्षित और सुविधाजनक आवागमन उपलब्ध हो। उनका कहना है कि प्रशासन को किसी बड़े हादसे का इंतजार करने के बजाय समय रहते आवश्यक कदम उठाने चाहिए, ताकि जनधन की हानि से बचा जा सके और लोगों का भरोसा भी कायम रहे।


